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  • संघर्ष ने बनाया मजबूत, मेहनत ने दिलाई पहचान: Shri Sai Furniture & Plywood की सफलता के पीछे Akash Sanjay Raut की कहानी

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    कहते हैं कि सफलता किसी की परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसके हौसलों और मेहनत की पहचान होती है। इस बात को सच साबित किया है Shri Sai Furniture & Plywood के संस्थापक Mr. Akash Sanjay Raut ने। आर्थिक तंगी, पारिवारिक समस्याएं और बचपन से मिली कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। मात्र ₹10,000 की पूंजी से शुरू किया गया उनका छोटा-सा कारोबार आज एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है, जो 20 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है।

    बचपन में ही बदल गई जिंदगी

    आकाश संजय राऊत का बचपन सामान्य परिवार में बीता, लेकिन कुछ वर्षों बाद पारिवारिक परिस्थितियां अचानक बदल गईं। माता-पिता के बीच हुए मतभेदों के कारण परिवार अलग हो गया और उनकी मां दोनों बेटों को लेकर अपने मायके चली गईं। इसी दौरान लगातार मानसिक तनाव के कारण उनकी मां की तबीयत भी बिगड़ गई, जिससे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति और अधिक कठिन हो गई।

    कुछ समय बाद परिवार अमरावती में एक छोटे से किराए के 10×10 फीट के कमरे में रहने लगा। उनकी मां लोगों के घरों में काम करके परिवार का पालन-पोषण करती थीं। छोटे भाई की पढ़ाई जारी थी, जबकि आकाश पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करके मां का सहयोग करते थे। कई बार परिवार को दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता था।

    छोटी-सी सीख ने बदल दी सोच

    इन्हीं संघर्षों के बीच उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। घर के पास एक बढ़ई (कारपेंटर) काम करता था। आकाश अक्सर उसके पास बैठकर उसका काम देखते और छोटी-मोटी मदद करते थे। यहीं से उनके भीतर फर्नीचर निर्माण के प्रति रुचि पैदा हुई।

    यही अनुभव उनके जीवन का Turning Point साबित हुआ। उन्होंने महसूस किया कि यदि वे पूरी मेहनत और ईमानदारी से यह काम सीख लें, तो भविष्य में अपने दम पर कुछ बड़ा कर सकते हैं।

    ₹20 प्रतिदिन से शुरू हुआ सफर

    जब वे सातवीं कक्षा में थे, तब परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उनके नाना ने उन्हें एक बढ़ई मिस्त्री के पास काम पर लगा दिया। शुरुआती दिनों में उन्हें सिर्फ ₹20 प्रतिदिन मेहनताना मिलता था।

    लेकिन उन्होंने कभी पैसों से ज्यादा काम सीखने को महत्व दिया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा ने उन्हें एक कुशल कारीगर बना दिया। दसवीं तक पहुंचते-पहुंचते उनकी दैनिक आय ₹200 प्रतिदिन हो चुकी थी।

    नौकरी नहीं, अपना व्यवसाय करने का लिया फैसला

    दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार फिर से गांव लौट आया। गांव में भी उन्होंने लगभग दो वर्षों तक फर्नीचर निर्माण का कार्य किया और इस दौरान उन्हें उद्योग का अच्छा अनुभव प्राप्त हुआ।

    इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने तय किया कि अब वे दूसरों के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए काम करेंगे। वर्ष 2019 में उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।

    ₹10,000 से रखी सफलता की नींव

    व्यवसाय शुरू करने के समय उनके पास केवल ₹10,000 की पूंजी थी। बाकी लगभग ₹60,000 उन्होंने अपने मित्रों और रिश्तेदारों से उधार लेकर जुटाए।

    5 जुलाई 2019 को महाराष्ट्र के तिवसा में उन्होंने अपना पहला शोरूम शुरू किया। शुरुआत में दुकान में बहुत सीमित सामान था, लेकिन ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए उन्होंने हर काम पूरी ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ किया।

    धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया और व्यवसाय भी लगातार आगे बढ़ने लगा।

    कोरोना महामारी भी नहीं रोक सकी हौसले

    साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देशभर में हजारों छोटे व्यवसाय बंद हो गए, लेकिन आकाश ने हिम्मत नहीं हारी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धैर्य, सकारात्मक सोच और ग्राहकों के विश्वास के सहारे अपने व्यवसाय को जारी रखा।

    यही कठिन समय उनके लिए सीख और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दौर साबित हुआ।

    व्यवसाय का हुआ विस्तार

    वर्ष 2021 में उन्होंने अपने शोरूम के पास दो अतिरिक्त दुकानें किराए पर लेकर व्यवसाय का विस्तार किया। इसी दौरान उन्होंने Plywood, Aluminium, Glass और Hardware से जुड़ी सेवाएं भी शुरू कीं।

    इसी वर्ष उनके व्यवसाय को नया स्वरूप मिला और Shri Sai Furniture & Plywood नाम से एक व्यापक पहचान स्थापित हुई।

    आज यह प्रतिष्ठान आधुनिक फर्नीचर निर्माण, इंटीरियर समाधान, प्लाईवुड, एल्यूमिनियम, ग्लास और हार्डवेयर से संबंधित गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहा है।

    परिवार और टीम बनी सबसे बड़ी ताकत

    आकाश राऊत का मानना है कि किसी भी सफलता के पीछे परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।

    आज उनके छोटे भाई वैभव संजय राऊत व्यवसाय के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनके पिता संजयराव राऊत, जो पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, अब पूर्णकालिक रूप से व्यवसाय संभाल रहे हैं।

    उनके मित्र मयूर चौधरी भी शुरुआती दिनों से इस सफर का हिस्सा हैं। इसके अलावा कई अन्य कर्मचारी भी उनके साथ जुड़े हुए हैं।

    आज उनकी टीम लगभग 20 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रही है, जिससे अनेक परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

    मां की सेवा ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी

    व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद भी आकाश अपनी जिम्मेदारियों को नहीं भूले। वे आज भी अपनी मां के उपचार और पूरे परिवार की देखभाल को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    उनका मानना है कि जीवन में मिली हर सफलता का सबसे बड़ा उद्देश्य परिवार को बेहतर जीवन देना होना चाहिए।

    युवाओं के लिए प्रेरणा

    आज आकाश संजय राऊत केवल एक सफल उद्यमी नहीं हैं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

    उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में ईमानदारी, मेहनत, सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है।

    सफलता का संदेश

    आकाश संजय राऊत का जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देता है। उनका मानना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

    आज Shri Sai Furniture & Plywood केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास, गुणवत्ता और रोजगार सृजन का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि “संघर्ष सफलता का अंत नहीं, बल्कि उसकी सबसे मजबूत शुरुआत होता है।”

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