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  • संजय राउत का बड़ा दावा: “नितिन गडकरी को बदनाम कर रहे हैं बीजेपी के ही नेता”, महाराष्ट्र की राजनीति में मचा बवाल

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    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गडकरी की छवि खराब करने की कोशिश विपक्ष नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ही कुछ नेता कर रहे हैं। राउत के इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

    “गडकरी को बदनाम करने में बीजेपी के लोग शामिल”

    मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा कि इथेनॉल नीति को लेकर लोगों के बीच जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसके पीछे बाहरी ताकतें नहीं बल्कि बीजेपी के ही कुछ लोग हैं। उनका दावा है कि नितिन गडकरी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने और उनकी लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

    “2029 को लेकर रची जा रही साजिश”

    संजय राउत ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में नितिन गडकरी प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार बन सकते हैं, इसलिए उनकी छवि खराब करने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2014 से पहले भी गडकरी को इसी तरह राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की गई थी।

    इथेनॉल नीति पर गडकरी का पक्ष

    हाल ही में इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति पर उठ रहे सवालों के बीच नितिन गडकरी ने कहा था कि इस नीति से उन्हें कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और इथेनॉल नीति देश के हित में बनाई गई है।

    एकनाथ शिंदे को भी दिया जवाब

    संजय राउत ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनका विवाद किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस राजनीतिक घटनाक्रम से है जिसमें शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन हुआ।

    राउत ने आरोप लगाया कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मदद से मूल राजनीतिक दलों को कमजोर किया गया, और यही उनके विरोध का मुख्य कारण है।

    राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

    संजय राउत के इन आरोपों पर फिलहाल बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके बयान के बाद नितिन गडकरी और बीजेपी की आंतरिक राजनीति को लेकर चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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