
संघर्ष से शुरू हुआ प्रेरणादायी सफर
सौ. संजीवनी लांजेवार का जन्म एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ, जहां बचपन से ही मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और समाजसेवा के संस्कार मिले। आर्थिक परिस्थितियाँ सामान्य होने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और एम.ए. (अर्थशास्त्र) तक शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा ने उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सहकार आंदोलन और वित्तीय प्रबंधन की गहरी समझ प्रदान की।
20 वर्ष की उम्र में रखा सहकार क्षेत्र में कदम
सिर्फ 20 वर्ष की आयु में उन्होंने सहकार क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। एक सहकारी पतसंस्था में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक वास्तविकताओं को करीब से देखा। विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक निर्भरता और संसाधनों की कमी ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
यहीं से उनके मन में एक ऐसी संस्था बनाने का विचार जन्मा, जो केवल वित्तीय सेवाएँ ही नहीं बल्कि ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बने।
पति की प्रेरणा बनी सफलता की नींव
अपने इस सपने को साकार करने में उनके दिवंगत पति स्वर्गीय रवी लांजेवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने हर कदम पर संजीवनी जी का हौसला बढ़ाया और स्वयं की सहकारी संस्था स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
इसी प्रेरणा का परिणाम था कि 5 सितंबर 2021 को संजीवनी महिला ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था, सिहोरा की स्थापना हुई।
सीमित संसाधन, लेकिन अटूट विश्वास
किसी भी नई संस्था की शुरुआत आसान नहीं होती। सीमित पूंजी, लोगों का विश्वास जीतने की चुनौती, प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा—इन सभी कठिनाइयों का सामना संजीवनी जी ने धैर्य और ईमानदारी के साथ किया।
उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। पारदर्शिता, सेवा भावना और विश्वास को ही संस्था की सबसे बड़ी पूंजी बनाया। यही कारण है कि आज यह संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।
आज चार शाखाओं के माध्यम से हजारों लोगों तक पहुंच
आज संस्था की सिहोरा, बाघेडा, नाकाडोंगरी और लोहारा में कुल चार शाखाएँ सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।
संस्था से 1,123 से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। यहां बचत खाते, सावधि जमा (Fixed Deposit), ऋण सुविधा, डिजिटल बैंकिंग, QR Code, NEFT, RTGS जैसी आधुनिक वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
महिला सशक्तिकरण बना सबसे बड़ा मिशन
संजीवनी लांजेवार का मानना है कि यदि महिलाएँ आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होगा।
इसी सोच के साथ वे महिलाओं को बचत की आदत, वित्तीय योजना, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देती हैं। उनकी संस्था आज अनेक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही है।
सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही संस्था
संस्था केवल वित्तीय सेवाओं तक सीमित नहीं है। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय-समय पर विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान, सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को फल वितरण तथा समाजहित के अनेक कार्यक्रम संस्था की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
सबसे कठिन समय में भी नहीं टूटा हौसला
संजीवनी जी के जीवन का सबसे कठिन दौर तब आया जब उनके पति का असमय निधन हो गया।
व्यक्तिगत दुःख, परिवार की जिम्मेदारियाँ और संस्था का नेतृत्व—इन तीनों चुनौतियों का सामना एक साथ करना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने अपने दुःख को ही अपनी ताकत बनाया और पति के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर पहले से भी अधिक ऊर्जा के साथ संस्था को आगे बढ़ाया। आज उनकी हर उपलब्धि में उनके दिवंगत पति की प्रेरणा झलकती है।
विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी
संजीवनी लांजेवार का मानना है कि कोई भी संस्था केवल आर्थिक लेन-देन से बड़ी नहीं बनती, बल्कि लोगों के विश्वास, ईमानदारी और सेवा भावना से अपनी पहचान बनाती है।
इसी सिद्धांत के कारण संस्था का प्रत्येक सदस्य स्वयं को परिवार का हिस्सा महसूस करता है।
हजारों महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
आज संजीवनी लांजेवार की सफलता की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
उन्होंने यह साबित किया है कि यदि संकल्प मजबूत हो, मेहनत ईमानदार हो और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो, तो एक साधारण परिवार की बेटी भी सफल नेतृत्व स्थापित कर सकती है।
भविष्य का लक्ष्य
संजीवनी लांजेवार का उद्देश्य केवल संस्था का विस्तार करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और सहकार आंदोलन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना है।
वे आधुनिक तकनीक, पारदर्शी प्रबंधन और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संस्था को राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श सहकारी संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं।
विदर्भरत्न सम्मान से मिलेगा नया उत्साह
उनके अनुसार विदर्भरत्न पुरस्कार केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं होगा, बल्कि उनके संघर्ष, महिला सशक्तिकरण, समाजसेवा और सहकार क्षेत्र में दिए गए योगदान की सार्वजनिक पहचान होगी। यह सम्मान उन्हें समाज के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की नई प्रेरणा देगा।
जीवन का संदेश
संजीवनी लांजेवार का मानना है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और ईमानदारी साथ हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
उनका जीवन संदेश आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है—
“अपने लिए जीने वाले बहुत होते हैं, लेकिन समाज के लिए जीने वाले ही वास्तव में सफल कहलाते हैं।”








