
कारंजा नागरी सहकारी पतसंस्था की स्थापना वर्ष 1989 में हुई थी। उस समय सहकारी पतसंस्थाओं की अवधारणा नई थी और लोगों में इनके प्रति जागरूकता भी सीमित थी। प्रारंभिक वर्षों में संस्था बहुत कम पूंजी और सीमित संसाधनों के साथ कार्य कर रही थी। वर्ष 1989 से 1995 तक संस्था ने अनेक चुनौतियों का सामना किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया।
वर्ष 1995 में जब श्री राजाभाऊ डोणगावकर ने संस्था के अध्यक्ष का दायित्व संभाला, तब संस्था के पास बहुत कम शेयर पूंजी और सीमित बैंक बैलेंस था। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी संस्था को आगे बढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व, पारदर्शी प्रशासन और अनुशासित कार्यप्रणाली के माध्यम से संस्था में नया विश्वास पैदा किया।
उन्होंने संस्था के प्रत्येक वित्तीय निर्णय में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सदस्यों का विश्वास जीतने के लिए ईमानदारी, जवाबदेही और बेहतर ग्राहक सेवा को संस्था की कार्यसंस्कृति बनाया। परिणामस्वरूप संस्था ने कुछ ही वर्षों में लाखों से करोड़ों रुपये की आर्थिक प्रगति का उल्लेखनीय सफर तय किया।
श्री राजाभाऊ डोणगावकर की कार्यकुशलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उनके नेतृत्व में कारंजा नागरी सहकारी पतसंस्था को अपना स्वयं का आधुनिक एवं सुसज्जित दो मंजिला भवन प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि जिले की सहकारी पतसंस्थाओं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी गई, क्योंकि जिले में सबसे पहले अपनी स्वयं की आधुनिक इमारत स्थापित करने का गौरव इसी संस्था को प्राप्त हुआ।
समय के साथ संस्था ने आधुनिक तकनीकों को भी अपनाया। आज संस्था पूर्णतः कंप्यूटरीकृत है तथा इसकी तीन शाखाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। अध्यक्ष श्री राजाभाऊ डोणगावकर के नेतृत्व में संस्था की शेयर पूंजी आज लगभग 15 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है, जो संस्था की निरंतर प्रगति और जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक है।
कारंजा नागरी सहकारी पतसंस्था ने केवल वित्तीय सेवाएं प्रदान करने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास किया। संस्था द्वारा गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों, उद्यमियों तथा विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों को आवश्यकतानुसार ऋण उपलब्ध कराकर उनके आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
संस्था की विशेष सेवाओं में स्वर्ण तारण (गोल्ड लोन) सुविधा भी शामिल है, जिससे हजारों सदस्यों को समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। संस्था अपने सदस्यों की आवश्यकताओं को समझते हुए सरल, सुरक्षित और विश्वसनीय बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रही है।

प्राकृतिक आपदाओं एवं आपातकालीन परिस्थितियों में भी संस्था ने सदैव संवेदनशील भूमिका निभाई है। शासन के निर्देशों का पालन करते हुए समय-समय पर राहत कार्यों में सहयोग और आर्थिक सहायता प्रदान कर संस्था ने सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
आज कारंजा शहर तथा पूरे तालुका में संस्था के हजारों सदस्य जुड़े हुए हैं। संस्था का उद्देश्य केवल वित्तीय सेवाएं देना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक सशक्तिकरण पहुंचाना है। इसी सोच के साथ संस्था भविष्य में अपनी प्रत्येक शाखा के लिए स्वयं की आधुनिक इमारत निर्मित करने की योजना पर कार्य कर रही है।
श्री राजाभाऊ डोणगावकर का योगदान केवल सहकारिता तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में भी अत्यंत सक्रिय हैं। वे कारंजा शहर की प्रतिष्ठित संस्था महावीर ब्रह्मचारी आश्रम के अध्यक्ष एवं ट्रस्टी हैं, जहां उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं संस्कार प्राप्त हो रहे हैं। शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण की उनकी सोच उन्हें एक संवेदनशील सामाजिक नेतृत्व प्रदान करती है।
राजनीतिक क्षेत्र में भी श्री राजाभाऊ डोणगावकर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। जनसेवा, सामाजिक विकास और सहकारिता के माध्यम से उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनका नेतृत्व सदैव विकास, पारदर्शिता और जनहित के मूल्यों पर आधारित रहा है।
आज कारंजा नागरी सहकारी पतसंस्था मर्यादित, कारंजा (लाड) क्षेत्र की सबसे विश्वसनीय सहकारी संस्थाओं में गिनी जाती है। इसका श्रेय काफी हद तक श्री राजाभाऊ डोणगावकर की दूरदृष्टि, ईमानदार नेतृत्व, अनुशासित प्रबंधन और समाज के प्रति समर्पण को जाता है।
उनकी जीवन यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व में ईमानदारी, दूरदर्शिता और समाज के प्रति सेवा भाव








