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  • पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) पर बड़ा कदम, ड्राफ्ट बिल की समीक्षा के लिए बनी हाई-लेवल कमेटी

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    पश्चिम बंगाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए ड्राफ्ट बिल की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन किया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित कानून के व्यापक प्रभाव और विस्तृत स्वरूप को देखते हुए यह समिति बनाई गई है।

    समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। यह समिति ड्राफ्ट यूसीसी बिल का विस्तृत अध्ययन करेगी और अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद ही सरकार प्रस्तावित कानून पर आगे का निर्णय लेगी।

    क्या होगा UCC बिल का उद्देश्य?

    राज्य सरकार के अनुसार, प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए, धर्म, आस्था या समुदाय से परे, व्यक्तिगत नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।

    ड्राफ्ट बिल में मुख्य रूप से निम्न विषय शामिल किए गए हैं—

    • विवाह (Marriage)
    • तलाक (Divorce)
    • उत्तराधिकार (Inheritance)
    • वसीयत एवं संपत्ति का हस्तांतरण (Testamentary & Intestate Succession)

    समिति में कौन-कौन हैं शामिल?

    जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के अलावा समिति में कई वरिष्ठ प्रशासनिक, कानूनी और शैक्षणिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—

    • पूर्व मेघालय राज्यपाल तथागत रॉय
    • रेजिडेंट कमिश्नर दुष्यंत नारियाला
    • सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह
    • गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रमुख सचिव संघमित्रा घोष
    • शिक्षाविद डॉ. रत्ना भट्टाचार्य
    • गौर बंग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा
    • अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक
    • पूर्व कार्यकारी निदेशक निर्मल्य भट्टाचार्य

    कैबिनेट बैठक के बाद लिया गया फैसला

    सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस समिति के गठन का निर्णय 2 जुलाई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था। समिति अब ड्राफ्ट बिल का कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से व्यापक परीक्षण करेगी।

    संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला

    सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि यह पहल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप की गई है, जिसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।

    चौथा राज्य बन सकता है पश्चिम बंगाल

    अब तक उत्तराखंड, गुजरात और असम अपने-अपने राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर चुके हैं। यदि प्रस्तावित विधेयक पारित होता है, तो पश्चिम बंगाल UCC लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा।

    राजनीतिक रूप से भी अहम कदम

    वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल किया था। चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद अब राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

    फिलहाल समिति ड्राफ्ट बिल का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाए या उसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।

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