देश को झकझोर देने वाले श्रद्धा वाकर हत्याकांड को चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। मामले का ट्रायल अभी भी जारी है और अदालत में सुनवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। इस बीच यह भी सामने आया है कि आरोपी आफताब पूनावाला की व्यक्तिगत जरूरतों के चलते कई बार अदालत की कार्यवाही टालनी पड़ी है।
हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने आफताब को 20 जुलाई की निर्धारित सुनवाई में पेश होने से छूट दे दी, ताकि वह तिहाड़ जेल से एमए समाजशास्त्र (Sociology) की परीक्षा दे सके। इससे पहले भी अदालत ने उसे दांतों के इलाज और मनोचिकित्सकीय परामर्श के लिए सुनवाई स्थगित करने की अनुमति दी थी।
तीन साल से अधिक समय से चल रहा ट्रायल
श्रद्धा वाकर हत्याकांड में 10 नवंबर 2022 को एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि मई 2023 में आरोप तय किए गए। तब से अब तक 215 से अधिक सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष अभी भी अपने साक्ष्य पेश कर रहा है।
बताया जा रहा है कि इस मामले की चार्जशीट 13,000 से अधिक पन्नों की है। वहीं बचाव पक्ष द्वारा गवाहों से लंबी जिरह भी ट्रायल में देरी का प्रमुख कारण बनी हुई है। एक पुलिस हेड कांस्टेबल की गवाही पर ही आठ अलग-अलग सुनवाई हो चुकी हैं और जिरह अभी भी जारी है।
परिवार ने उठाए न्याय में देरी पर सवाल
श्रद्धा वाकर के पिता विकास वाकर का वर्ष 2025 में अपनी बेटी को न्याय मिले बिना ही निधन हो गया। वहीं उनकी दादी का भी ट्रायल के दौरान निधन हो चुका है।
अब श्रद्धा की बुआ राजल नाइक परिवार की ओर से लगातार अदालत की कार्यवाही में शामिल हो रही हैं। उन्होंने आरोपी को बार-बार मिल रही राहत पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि परिवार हर सुनवाई के लिए मुंबई से दिल्ली आता है, लेकिन कई बार सुनवाई आरोपी की मांग पर टाल दी जाती है। उनका कहना है कि यदि यह फास्ट ट्रैक ट्रायल है, तो बार-बार की देरी का क्या औचित्य है।
‘हमें सिर्फ न्याय चाहिए’
राजल नाइक ने कहा कि परिवार आज भी श्रद्धा के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा है, क्योंकि जांच के दौरान बरामद अवशेष अभी भी साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे गए हैं।
उन्होंने अदालत से अपील करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई में अब और देरी नहीं होनी चाहिए तथा जल्द से जल्द फैसला सुनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोपी आफताब पूनावाला को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग भी दोहराई।
फिलहाल श्रद्धा वाकर हत्याकांड में अदालत की कार्यवाही जारी है और पीड़ित परिवार वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।








