• Create News
  • ▶ Play Radio
  • पश्चिम बंगाल में 1 सितंबर से सरकारी कामकाज में बंगाली भाषा होगी अनिवार्य, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कामकाज में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि 1 सितंबर 2026 से राज्य सरकार के सभी विभागों में सरकारी कार्यों के लिए बंगाली भाषा का उपयोग अनिवार्य होगा। इस निर्णय का उद्देश्य प्रशासन को आम नागरिकों की भाषा के अधिक निकट लाना और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय न्यायमूर्ति सुशांत चटर्जी आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह आयोग वर्ष 2011 में गठित किया गया था और अब उसकी रिपोर्ट को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।

    नई व्यवस्था के तहत सरकारी कार्यालयों में नागरिक सेवाएं, डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम, आवेदन पत्र, प्रमाण पत्र, पोर्टल, वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, प्रशिक्षण सामग्री, सार्वजनिक सूचना पट्ट, प्रेस विज्ञप्तियां तथा अन्य सभी आधिकारिक संचार मुख्य रूप से बंगाली भाषा में किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि एवं भूमि सुधार विभाग से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक सभी सरकारी विभागों में बंगाली भाषा का उपयोग अनिवार्य होगा। हालांकि, केंद्र सरकार के साथ आधिकारिक पत्राचार के लिए हिंदी भाषा का भी उपयोग जारी रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक सेवाओं, शपथ पत्रों, मोबाइल ऐप, नागरिक चार्टर, एफआईआर, सरकारी अधिसूचनाओं तथा अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों में भी बंगाली भाषा को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी मंत्री और विधायक अपने-अपने विभागों में इस निर्णय के अनुपालन की समीक्षा करेंगे तथा निर्धारित समय के भीतर इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजेंगे।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी एक पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें भारतीय भाषाओं के अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया गया था। उन्होंने विधानसभा में पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उचित स्थान मिलना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक जन-केंद्रित बन सके।

    उन्होंने कहा कि महान शिक्षाविद और विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों में उनके व्यापक उपयोग के प्रबल समर्थक थे। सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा में प्रशासन होने से आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक सरलता और प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

    राज्य सरकार के इस फैसले को पश्चिम बंगाल की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के बाद राज्य के सभी सरकारी विभागों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा।

  • Related Posts

    “अपोलो फार्मेसी में टैगोर इंस्टीट्यूट के 7 विद्यार्थियों का चयन, फार्मासिस्ट पद पर बनाएंगे करियर”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़ किसी विद्यार्थी की वर्षों की मेहनत तब सार्थक होती है, जब पढ़ाई…

    Continue reading
    “मनोज जरांगे पाटील : ‘पाटील मेरी गाड़ी में बैठिए और…’ डिफेंडर गाड़ी पर लगे आरोपों पर जरांगे पाटील ने दिया स्पष्टीकरण”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील इन दिनों पश्चिम महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। इसी दौरान उन्होंने मराठा…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *