NEET पेपर लीक विवाद, छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 26 जुलाई को मुंबई में संयुक्त विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने बताया कि यह मार्च रविवार सुबह शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की आवाज को मजबूती देना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करना है।
राज ठाकरे ने कहा कि देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना था कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और समय रहते संवाद की पहल नहीं की गई।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि मार्च का समापन सिद्धिविनायक मंदिर में होगा, जहां सरकार को सद्बुद्धि मिले और छात्रों को न्याय मिले, इसके लिए प्रार्थना की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों का आंदोलन है।
नेताओं के अनुसार, इस विरोध मार्च में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं रहेगा। आंदोलन को छात्र-केंद्रित बनाए रखने पर जोर दिया गया है। हालांकि, महाविकास आघाड़ी के अन्य सहयोगी दलों के भी इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि समय रहते छात्रों से बातचीत की जाती और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार को छात्रों की भावनाओं को समझना चाहिए।
दोनों नेताओं ने छात्रों और नागरिकों से शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसी भावना के साथ यह मार्च आयोजित किया जाएगा।
26 जुलाई को प्रस्तावित यह संयुक्त मार्च महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्रों के मुद्दों पर ठाकरे बंधुओं का एक मंच पर आना राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है।








