• Create News
  • ▶ Play Radio
  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड, शेयर या अपलोड करने पर रोक

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय की कार्यवाही से जुड़े ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के अनियंत्रित प्रसार पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि संबंधित अदालत की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड, संपादित, साझा, री-पोस्ट, अपलोड या उससे कमाई (Monetise) नहीं की जा सकेगी।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम निर्देश जारी किया। अदालत ने सोशल मीडिया पर न्यायालय की कार्यवाही के चुनिंदा और संदर्भ से हटाकर प्रसारित किए जा रहे वीडियो पर गंभीर चिंता जताई।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित ऑडियो-वीडियो सामग्री को साझा करने के लिए संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति आवश्यक होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जुड़ी सामग्री के लिए सेक्रेटरी जनरल की पूर्व अनुमति लेनी होगी।

    हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश समाचार माध्यमों द्वारा न्यायालय की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर लागू नहीं होगा। अदालत ने कहा कि इसे प्रेस की स्वतंत्रता या मीडिया पर किसी प्रकार का ‘गैग ऑर्डर’ नहीं माना जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सोशल मीडिया पर कोर्ट की रिकॉर्डिंग का अनियंत्रित प्रसार अब “बोतल से बाहर निकले जिन्न” जैसा हो गया है। उन्होंने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल वीडियो रिकॉर्डिंग और उसके प्रसार को नियंत्रित करना है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।

    उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें 24 घंटे चलने वाला मनोरंजन चैनल नहीं बन सकतीं। इसलिए वर्चुअल सुनवाई और लाइव स्ट्रीमिंग तक पहुंच को भी नियंत्रित करना आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि किसी पक्ष को लाइव कार्यवाही देखनी है तो उसे उचित अनुमति प्राप्त करनी होगी और लिंक का अनियंत्रित प्रसार नहीं होना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सोशल मीडिया पर कोर्ट की क्लिप्स के दुरुपयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से वीडियो में छेड़छाड़ की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि AI तकनीक की मदद से न्यायाधीशों और वकीलों के कथनों को बदलकर भ्रामक वीडियो तैयार किए जा सकते हैं।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी इस दौरान मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में उनके बारे में ऐसी बातें प्रकाशित की गईं जो उन्होंने कभी कही ही नहीं थीं। उन्होंने विशेष रूप से छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में यह स्पष्ट किया कि उनके समक्ष कोई विधिवत याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी, केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था। इसके बावजूद कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि उन्होंने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जो पूरी तरह गलत था।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में Meta, X (पूर्व में Twitter) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही से जुड़े वीडियो के प्रसार को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भूमिका और जिम्मेदारी की भी समीक्षा की जाएगी।

    शीर्ष अदालत का यह अंतरिम आदेश न्यायिक कार्यवाही की गरिमा, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की पारदर्शिता और मीडिया की स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर इस आदेश का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • Related Posts

    किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी; कर्जमाफी की पहली किस्त जारी, 6.22 लाख किसानों के खातों में 5,029 करोड़ रुपये जमा

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। महाराष्ट्र के किसानों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से अहिल्यादेवी होलकर…

    Continue reading
    माऊली शेती औजारे: आधुनिक कृषि उपकरणों के साथ किसानों की प्रगति का संकल्प, सोमनाथ सोनवणे की प्रेरणादायक पहल

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर उपकरणों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए माऊली शेती औजारे किसानों के लिए…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *