शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का भाजपा और एनडीए सांसदों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। संसद परिसर में उनके समर्थन में “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगे और कई सांसदों ने उन्हें पारंपरिक टोपी व शॉल पहनाकर सम्मानित किया।
संसद पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान ने मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन किया। इसी दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उनसे कहा, “It happens” (ऐसा होता रहता है)। इस पर प्रधान ने जवाब दिया, “कुछ नहीं हुआ। मैं एसी रूम एक्टिविस्ट नहीं, स्ट्रीट फाइटर हूं।”
भाजपा सांसदों ने इसे उनके संघर्षशील स्वभाव का प्रतीक बताते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। एक सांसद ने यह भी कहा कि बिना किसी व्यक्तिगत आरोप के किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा देना एक असाधारण घटना है।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उन्हें पीड़ा हुई है, लेकिन देश के युवाओं के हित सर्वोपरि हैं और वे नहीं चाहते कि युवाओं का भविष्य किसी भ्रम या विवाद का शिकार बने।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है या फिर आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में भूमिका दी जा सकती है। इससे पहले भी वे बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी के चुनावी अभियान की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनके आवास पर मुलाकात की थी। वहीं भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने शिक्षा क्षेत्र में उनके कार्यों और सुधारों की सराहना करते हुए उनके फैसले को राजनीतिक जवाबदेही और राष्ट्रीय हित का उदाहरण बताया।
ओडिशा की राजनीति में भी धर्मेंद्र प्रधान का प्रभाव बरकरार माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनके इस्तीफे से राज्य में उनकी राजनीतिक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहेंगे।








