मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु की विजय सरकार को बड़ा झटका देते हुए करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरियों में समान अवसर) का उल्लंघन करता है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस तरह की नियुक्तियों को अनुमति दी गई तो भविष्य में इसी तरह के मामलों की बाढ़ आ जाएगी और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होगी।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में करूर में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय राज्य में डीएमके सरकार सत्ता में थी। पुलिस ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि विजय के कार्यक्रम स्थल पर देर से पहुंचने के कारण भीड़ क्षमता से अधिक हो गई थी। साथ ही पेयजल, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी हादसे का कारण बताया गया था। हालांकि TVK ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था।
इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री विजय ने करूर दौरे के दौरान मृतकों के 32 परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे। सरकार का कहना था कि यह कदम पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हालांकि, विपक्षी दल AIADMK ने इस फैसले का विरोध किया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने आरोप लगाया था कि सरकार ने नियमित भर्ती प्रक्रिया और TNPSC के नियमों को दरकिनार कर राजनीतिक कारणों से नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने कहा था कि इससे वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के साथ अन्याय होगा।
अब मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद विजय सरकार द्वारा जारी किए गए नियुक्ति आदेश निरस्त हो गए हैं। वहीं करूर भगदड़ मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के पास है, जो रैली के दौरान भीड़ प्रबंधन, आयोजन व्यवस्था और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।








