केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने दिल्ली स्थित सीपीएम (CPI-M) कार्यालय में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कहा कि यह सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति थी और विपक्ष इस मामले का अनावश्यक राजनीतिकरण कर रहा है।
राज्यसभा में सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने पार्टी कार्यालय में पुलिस के प्रवेश का मुद्दा उठाया। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई और किसी भी छात्र कार्यकर्ता को ऐसे हालात का सामना करना पड़ सकता है।
जेपी नड्डा ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी छात्र आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण कई बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
यह मामला उस समय सामने आया जब दिल्ली पुलिस की एक टीम कथित तौर पर एसएफआई (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की दिल्ली सचिव और पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ऐशे घोष को एक पुराने मामले में हिरासत में लेने के लिए सीपीएम के ए.के.जी. भवन पहुंची थी। हालांकि, पार्टी नेताओं के विरोध के बाद पुलिस बिना ऐशे घोष को साथ लिए लौट गई।
वहीं, सीपीएम ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में ऐशे घोष की भागीदारी से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि पुलिस पुराने मामले का इस्तेमाल कर छात्र नेताओं को निशाना बना रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पुलिस की कार्रवाई और उसके औचित्य को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।








