भिवंडी: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में गुरुवार रात हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। नारपोली गंगाराम वाड़ी स्थित चार मंजिला ‘कोहिनूर’ इमारत के अचानक ढह जाने से कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब 12 घंटे तक चले अभियान के बाद मलबे से एक और शव निकाला गया, जिसके बाद मृतकों का आंकड़ा 9 हो गया।
इस हादसे में 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। वहीं आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं। इसी कारण एनडीआरएफ की टीमें लगातार मलबा हटाकर खोज अभियान चला रही हैं।
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हो गए, जबकि पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को घेर लिया। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
अब तक जिन मृतकों की पहचान हो सकी है, उनमें शामिल हैं—
- शमीम शेख (32 वर्ष)
- रंजीत सिंह (45 वर्ष)
- मिराज रसूल शेख (34 वर्ष)
- संतोष कुमार पांडे (42 वर्ष)
- शमीम अंसारी (30 वर्ष)
अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिवंडी के आईजीएम सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।
भिवंडी महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त विठ्ठल डागे के अनुसार, ‘कोहिनूर’ इमारत को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था। महानगरपालिका ने इमारत के मालिकों को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे।
इसके बावजूद बिना किसी स्ट्रक्चरल ऑडिट के इमारत में मरम्मत और अन्य कार्य जारी थे। प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद अधिकारी रात में मौके पर पहुंचे और मजदूरों व निवासियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू ही कर रहे थे कि अचानक पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।
हादसे के तुरंत बाद एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने बचाव कार्य शुरू किया। भारी मलबे और लगातार खतरे के बावजूद जवानों ने पूरी रात अभियान जारी रखा। आधुनिक मशीनों और उपकरणों की मदद से मलबे को हटाकर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
एनडीआरएफ के अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरी तरह यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति नहीं है, तब तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा।
इस हादसे के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित कर नोटिस जारी की जा चुकी थी, तब उसमें काम कैसे जारी रहा और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया? इन सवालों को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है।
नागरिकों का कहना है कि शहर में कई पुरानी और जर्जर इमारतें हैं, जिनकी समय-समय पर जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबे को पूरी तरह हटाने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।








