बिहार के जहानाबाद शहर में गुरुवार को बुद्धिस्ट सोसाइटी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में बिहार बीटी एक्ट 1949 को समाप्त करने की मांग को लेकर एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस मार्च में भाग लिया और सरकार से कानून को तत्काल समाप्त करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से शांतिपूर्ण मार्च निकाला तथा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
विरोध मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए अंबेडकर चौक पहुंचा, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। सभा में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिस्ट समाज के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि बिहार बीटी एक्ट 1949 वर्तमान समय की परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गया है और इसकी वजह से आम लोगों को कई प्रकार की प्रशासनिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह कानून दशकों पुराना है और आज के लोकतांत्रिक एवं सामाजिक परिवेश में इसकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस कानून की व्यापक समीक्षा कर इसे तत्काल समाप्त किया जाए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भावनाओं और जनहित के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कानून से समाज के बड़े वर्ग को परेशानी हो रही है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उस कानून पर पुनर्विचार करे और आवश्यक संशोधन या उसे समाप्त करने का निर्णय ले।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर किया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से संवाद स्थापित करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।
सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में राज्य स्तर पर बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी और विभिन्न जिलों में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन ने पूरे मार्च पर नजर बनाए रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में विरोध मार्च शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। कहीं से भी किसी तरह की हिंसा या अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।
स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में इस विरोध मार्च को देखा। कई नागरिकों ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सकारात्मक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। सामाजिक संगठनों का कहना है कि वे भविष्य में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे।
बुद्धिस्ट सोसाइटी और अन्य संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए उचित निर्णय लेगी।
फिलहाल बिहार बीटी एक्ट 1949 को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और इस मामले में उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर टिकी हुई है।








