कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि यदि सरकार में “थोड़ी भी शर्म बाकी है” तो अमित शाह से इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और अन्य सख्त कदम उठाए गए, जिसके बाद अब छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन वापस लेने के समय छात्रों को भरोसा दिलाया गया था कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन अब सरकार अपने ही वादे से पीछे हट गई है। उनके अनुसार, कई छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं और छात्राओं की निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे मामले में उन्होंने संसद में जवाबदेही से बचने की कोशिश की। उनका कहना था कि देश के युवाओं के सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार अपनी छवि बचाने में लगी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि अब “इमेज बचाने की राजनीति” से काम नहीं चलेगा, क्योंकि देश का युवा सब कुछ समझ चुका है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करते हुए गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा लिया जाए।
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई थी। अब कांग्रेस अध्यक्ष के बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, दिल्ली में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
इस बीच, विपक्ष लगातार सरकार से छात्र आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज होने की संभावना है।








