शिवसेना के चुनाव चिन्ह और पार्टी पर अधिकार को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच कानूनी लड़ाई जारी है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के शिवसेना में योगदान को लेकर बड़ा बयान दिया है।
एकनाथ शिंदे ने हाल ही में कहा था कि पहले उनके साथ 40 विधायक थे और अब उनकी संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने नारायण राणे का उदाहरण दिया और उनके राजनीतिक योगदान को स्वीकार किया।
नारायण राणे के योगदान को राउत ने माना
संजय राउत ने कहा कि नारायण राणे बड़े नेता थे और उन्होंने शिवसेना के लिए काफी संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के विस्तार में राणे का योगदान रहा है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
राउत ने कहा कि नारायण राणे ने एक विशेष परिस्थिति में शिवसेना छोड़ी थी। हालांकि, उन्होंने शिवसेना पर अपना दावा नहीं किया, बल्कि अपना अलग राजनीतिक दल बनाने की कोशिश की और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
राउत ने राज ठाकरे का भी उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने शिवसेना छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई। उनके अनुसार, एकनाथ शिंदे को भी अलग पार्टी बनानी चाहिए थी।
“मैं कभी झूठ नहीं बोलता”
नारायण राणे के बारे में अपनी बात रखते हुए संजय राउत ने कहा कि राणे ने शिवसेना के लिए मेहनत की थी और पार्टी के विस्तार में उनका योगदान था।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “नारायण राणे बड़े नेता थे। पार्टी के लिए उन्होंने संघर्ष किया, यह स्वीकार करना चाहिए। पार्टी के विस्तार में उनका योगदान था, यह मानना चाहिए। मैं कभी झूठ नहीं बोलता।”
राउत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नारायण राणे लंबे समय से शिवसेना के प्रमुख राजनीतिक विरोधियों में रहे हैं।
शिवसेना पर अधिकार को लेकर फिर साधा निशाना
शिवसेना पर अधिकार के सवाल पर संजय राउत ने कहा कि शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे ने की थी और वर्तमान में उद्धव ठाकरे पार्टी के प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें सांसद बनाया है और वह पार्टी के आदेश से बंधे हुए हैं। राउत ने एकनाथ शिंदे के साथ गए विधायकों को लेकर भी कटाक्ष किया और कहा कि इन विधायकों को पार्टी ने ही चुनाव लड़ाया और जिताया था।
चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप
संजय राउत ने चुनाव आयोग और देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संवैधानिक संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं।
शिवसेना के चुनाव चिन्ह और पार्टी के अधिकार को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच राउत के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है।
“तूने कितने तोड़े, मैंने कितने तोड़े…”
एकनाथ शिंदे के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संभावित मुलाकात को लेकर सवाल पूछे जाने पर भी संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच चर्चा शायद इस बात पर होगी कि “तूने कितने तोड़े, मैंने कितने तोड़े और अभी कितने और तोड़ने हैं।”
राउत ने महाराष्ट्र में उद्योगपतियों को संपत्तियां और सार्वजनिक संस्थान दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने अडानी और अंबानी से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज
शिवसेना के चुनाव चिन्ह और पार्टी पर अधिकार को लेकर जारी कानूनी लड़ाई, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच राजनीतिक टकराव तथा आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच संजय राउत का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खास बात यह है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राउत ने नारायण राणे के शिवसेना में योगदान को खुलकर स्वीकार किया है। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।








