रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक को 86-11 वोट से मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत और चीन भी रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। ऐसे में इस विधेयक के आगे बढ़ने पर दोनों देशों के व्यापारिक हित प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
86-11 वोट से सीनेट में पास हुआ बिल
रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े इस द्विदलीय विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने 86 के मुकाबले 11 वोटों से पारित किया। यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में नामित किया गया है।
विधेयक के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर मॉस्को पर कार्रवाई को मजबूत करना है।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी विधेयक के पारित होने का समर्थन किया और कहा कि यूक्रेन के लोग अकेले नहीं हैं।
भारत और चीन पर 100% टैरिफ का प्रावधान
प्रस्तावित कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव है।
बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। इसके अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया भी वर्तमान में रूस से तेल एवं गैस के प्रमुख खरीदारों में गिने जा रहे हैं।
हालांकि, विधेयक में कुछ देशों के लिए अपवाद का भी प्रावधान है।
कुछ देशों को मिल सकती है छूट
बिल में उन देशों के लिए अपवाद का प्रावधान किया गया है जो अपनी प्राकृतिक गैस की 15 प्रतिशत से कम मात्रा रूस से आयात करते हैं और रूसी ऊर्जा आयात को कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए कुछ प्रतिबंधों या प्रतिबंधात्मक उपायों में छूट देने का अधिकार भी प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस के सामने राष्ट्रीय हित से जुड़ा प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
रूस के नेताओं और कंपनियों पर भी प्रतिबंध
विधेयक में केवल ऊर्जा आयात को लेकर ही कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ रूसी राजनीतिक एवं सैन्य अधिकारियों, रूसी वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही पुराने और दोबारा रजिस्ट्रेशन कराए गए तेल टैंकरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। अमेरिका का आरोप है कि ऐसे टैंकर मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस की मदद करते हैं।
ईरान पर भी बढ़ेगा अमेरिकी दबाव
रूस से संबंधित प्रतिबंधों के अलावा इस विधेयक में Iran Sanctions Act, 1996 की अवधि को वर्ष 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान शामिल है।
इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब अमेरिकी House of Representatives में जाएगा। सदन की अगली बैठक 31 अगस्त को प्रस्तावित है, जिसके बाद विधेयक पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
यदि प्रतिनिधि सभा भी इसे मंजूरी देती है और राष्ट्रपति इसे लागू करते हैं, तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। ऐसे में प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।
फिलहाल यह विधेयक सीनेट से पारित हुआ है, लेकिन इसके अंतिम रूप से कानून बनने और भारत पर किसी वास्तविक टैरिफ के लागू होने से पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी तथा आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।







