संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर सदन में अपना पक्ष रखने वाले थे। हालांकि, विपक्ष के भारी हंगामे के कारण अमित शाह अपना बयान नहीं दे सके और लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदन में मौजूद थे, लेकिन विपक्षी सदस्यों के लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन का कामकाज आगे नहीं बढ़ सका।
अमित शाह के बयान से पहले ही सदन में हंगामा
मानसून सत्र का गुरुवार को आखिरी दिन था। पिछले कई दिनों से संसद में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ था।
अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब देने को तैयार हैं। इसलिए आखिरी दिन उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी उत्सुकता थी।
लेकिन जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सदन में पहुंचे, विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
लोकसभा अध्यक्ष की अपील का भी असर नहीं
विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे के कारण सदन में सामान्य कामकाज करना मुश्किल हो गया।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की। हालांकि, विपक्षी सदस्यों का विरोध और नारेबाजी जारी रही।
स्थिति सामान्य नहीं होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
इस तरह अमित शाह का प्रस्तावित बयान हुए बिना ही संसद के मानसून सत्र का समापन हो गया।
संसद के बाहर भी विपक्ष का प्रदर्शन
सत्र के आखिरी दिन विपक्षी दलों ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले परिसर के बाहर भी प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, सुबह करीब 10:30 बजे मकर गेट के पास विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और राम मंदिर चोरी से जुड़े मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग शामिल थी।
अमित शाह पहले ही कह चुके थे- चर्चा के लिए तैयार
अमित शाह ने इससे पहले कहा था कि वह संसद में किसी भी चर्चा के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं बल्कि सदन में हंगामा करना है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है और वह सवालों का जवाब देने के लिए सदन में मौजूद रहेंगे।
इसके बावजूद आखिरी दिन सदन में विपक्ष का विरोध जारी रहा और अमित शाह को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिल सका।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर साधा निशाना
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई थी।
रिजिजू ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय हंगामा कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा था कि उनके लंबे संसदीय अनुभव में उन्होंने विपक्ष का ऐसा रवैया पहले नहीं देखा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में बढ़ा टकराव
पिछले कुछ दिनों से संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा था।
एक ओर सरकार का कहना था कि वह चर्चा के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष गृह मंत्री से सीधे बयान और संबंधित मुद्दों पर जवाब की मांग कर रहा था।
मानसून सत्र के आखिरी दिन भी यही गतिरोध समाप्त नहीं हुआ और भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर लोकसभा में बयान देने वाले थे, लेकिन विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण वह अपना बयान नहीं दे सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मौजूदगी के बावजूद सदन में नारेबाजी और विरोध जारी रहा। लोकसभा अध्यक्ष की बार-बार अपील के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई, जिसके चलते कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज सहित अन्य मुद्दों पर गृह मंत्री से जवाब की मांग की थी, जबकि अमित शाह पहले ही संसद में चर्चा और सवालों के जवाब देने की बात कह चुके थे।








