कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया सेंसरशिप के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। खरगे ने दावा किया कि मार्च से जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया कंपनियों को करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इस कार्रवाई से भारतीय नागरिकों के बोलने, सवाल करने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
पांच महीनों में 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश का दावा
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए सरकार पर सोशल मीडिया पर सेंसरशिप बढ़ाने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार, पांच महीनों में करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए। उन्होंने इस आंकड़े को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर आवाजों को व्यवस्थित तरीके से दबाने की कोशिश की जा रही है।
खरगे ने दावा किया कि इन आदेशों का असर उन छात्रों और युवाओं की आवाजों पर भी पड़ा, जो अपने भविष्य और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करने का आरोप लगाया।
उन्होंने सरकार की सोशल मीडिया संबंधी कार्रवाई की तुलना युवाओं पर कथित पुलिस कार्रवाई से करते हुए इसे निंदनीय बताया।
खरगे ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले रचनाकारों, पत्रकारों और आम नागरिकों को पोस्ट हटाए जाने, कानूनी नोटिस और धमकियों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर भी उठाए सवाल
खरगे ने अपने पोस्ट में सत्तारूढ़ दल के कुछ समर्थकों पर ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं की निजी जानकारी सार्वजनिक की जाती है और उन्हें गंभीर धमकियां दी जाती हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए हैं और प्रस्तुत सामग्री में इनके संबंध में किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है।
पोस्ट हटाने की समय-सीमा पर भी सवाल
खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की समय-सीमा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पोस्ट हटाने का समय घटाकर तीन घंटे कर दिया गया है और सेंसरशिप की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाया गया है।
उनका आरोप है कि इस व्यवस्था में किसी पोस्ट को हटाने से पहले पर्याप्त मानवीय समीक्षा नहीं होती।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना पक्ष
इसी बीच, जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है।
पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए जवानों ने अधिकतम संयम बरता और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बल का ही इस्तेमाल किया गया।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने और संसद की ओर मार्च करने के प्रयास के दौरान कई बैरिकेड तोड़े गए, जिसके बाद स्थिति बिगड़ी।
नुकीली कीलों वाली लाठियों के आरोप को पुलिस ने नकारा
दिल्ली पुलिस के हलफनामे में प्रदर्शन के दौरान नुकीली कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोपों पर भी जवाब दिया गया। दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आरोप के समर्थन में पेश किया गया वीडियो केवल एक अकेली रिकॉर्डिंग है।
मामले में पुलिस का पक्ष उन याचिकाओं के जवाब में सामने आया है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया सेंसरशिप के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने दावा किया कि मार्च से जुलाई 2026 के बीच करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए और आरोप लगाया कि इससे नागरिकों के बोलने, सवाल करने और असहमति जताने के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। खरगे ने ऑनलाइन उत्पीड़न और पोस्ट हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे के जरिए पुलिस कार्रवाई को आवश्यक और संयमित बताया है।








