




राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक महत्वपूर्ण भाषण दिया, जिसमें उन्होंने हिंदुस्थान को हिंदू राष्ट्र घोषित करते हुए इस विचारधारा से कभी समझौता न करने का स्पष्ट संदेश दिया। उनके इस बयान ने देशभर में चर्चा का विषय बना लिया है।
मोहन भागवत ने कहा, “हिंदुस्थान हिंदू राष्ट्र है, इससे कभी समझौता नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यह स्पष्ट किया कि RSS का उद्देश्य केवल हिंदू समाज की सेवा करना नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सेवा करना है। उनका मानना है कि हिंदू समाज की एकता और संगठन से ही देश की प्रगति संभव है।
RSS के 21 प्रमुख सिद्धांत
भागवत ने RSS के 21 प्रमुख सिद्धांतों को साझा किया, जो संघ की कार्यशैली और विचारधारा को स्पष्ट करते हैं:
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हिंदू एकता: हिंदू समाज को जाति, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।
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संस्कार आधारित शिक्षा: शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संस्कार देना भी होना चाहिए।
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राष्ट्रीयता: देश के प्रति निष्ठा और कर्तव्य पालन सबसे महत्वपूर्ण है।
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स्वदेशी उत्पादों का समर्थन: विदेशी उत्पादों के बजाय स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए।
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सामाजिक समरसता: समाज में सभी वर्गों के बीच समानता और भाईचारे की भावना होनी चाहिए।
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सुरक्षा: देश की सुरक्षा सबसे पहले है, और इसके लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
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धर्मनिरपेक्षता: धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों का सम्मान करना है, न कि धर्मों को अलग-अलग करना।
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संस्कृति का संरक्षण: भारतीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
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स्वावलंबन: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि देश किसी भी संकट में आत्मनिर्भर रहे।
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सामाजिक न्याय: समाज में सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।
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पर्यावरण संरक्षण: पर्यावरण की रक्षा करना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए।
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स्वास्थ्य: समाज में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार करना चाहिए।
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शिक्षा का प्रचार: शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति शिक्षित हो।
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महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को समान अधिकार और अवसर मिलना चाहिए।
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बालकों का कल्याण: बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए काम करना चाहिए।
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कृषि का विकास: कृषि क्षेत्र का विकास करना चाहिए, ताकि किसानों की स्थिति सुधरे।
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उद्योग का विकास: उद्योगों का विकास करना चाहिए, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध और विकास करना चाहिए।
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संघ का विस्तार: RSS का विस्तार करना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग संघ से जुड़ें।
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समाज सेवा: समाज की सेवा करना और समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करना चाहिए।
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धर्मनिष्ठा: धर्म के प्रति निष्ठा और आस्था बनाए रखना चाहिए।
भागवत ने कहा, “RSS का कार्य यांत्रिक नहीं, बल्कि विचार आधारित है। संघ का उद्देश्य केवल हिंदू समाज की सेवा करना नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सेवा करना है।” उन्होंने यह भी कहा कि RSS का कार्य समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करना और समाज में एकता और समरसता की भावना को बढ़ावा देना है।
भागवत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी RSS की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “RSS का कार्य केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में हिंदू समाज की एकता और कल्याण के लिए काम करना है।” उन्होंने यह भी कहा कि RSS का उद्देश्य केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हिंदू समाज की स्थिति को सशक्त बनाना है।
मोहन भागवत का यह भाषण RSS की विचारधारा और कार्यशैली को स्पष्ट करता है। उनके द्वारा साझा किए गए 21 सिद्धांत संघ के उद्देश्यों और लक्ष्यों को स्पष्ट करते हैं। उनका यह संदेश हिंदू समाज को एकजुट होने और देश की सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।