• Create News
  • ▶ Play Radio
  • छात्र राजनीति में बदलाव: ASAP नहीं लड़ेगी DUSU चुनाव, करेगी कैंपस पर फोकस

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

         दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) की छात्र इकाई “ASAP” ने एक अहम फैसला किया है। संगठन ने इस बार DUSU चुनाव में हिस्सा न लेने की घोषणा की है। ASAP ने स्पष्ट किया है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य फिलहाल कैंपस स्तर पर अपनी उपस्थिति और पकड़ को मजबूत करना है। इस फैसले ने छात्र राजनीति के माहौल में नई चर्चा छेड़ दी है।

    ASAP ने आधिकारिक बयान में कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों के बीच वैकल्पिक राजनीति को बढ़ावा देना है। संगठन का मानना है कि छात्र राजनीति केवल बड़े पदों पर कब्जा करने की होड़ नहीं होनी चाहिए, बल्कि वास्तविक मुद्दों—जैसे फीस वृद्धि, छात्रावासों की समस्याएं, कैंपस में सुरक्षा और रोजगार—को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    ASAP के नेताओं का कहना है कि इस साल DUSU चुनाव में न उतरकर वे जमीनी स्तर पर ज्यादा मजबूती से काम कर पाएंगे। उनका लक्ष्य है कि वे विभागीय और कॉलेज स्तर पर छात्रों की समस्याओं को सीधे हल करने के लिए सक्रिय रहें।

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव पूरे देश में सुर्खियों में रहते हैं। यह चुनाव न केवल छात्र राजनीति का आईना होते हैं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी कई नेताओं के लिए लॉन्चिंग पैड साबित होते हैं। अरुण जेटली, अजय माकन और विजय गोयल जैसे नेता DUSU से ही निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे। ऐसे में किसी भी बड़े छात्र संगठन का चुनाव से दूरी बनाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देता है।

    ASAP ने कहा कि वे अपनी ऊर्जा कॉलेजों और विभागों में छोटे-छोटे चुनावों और छात्र आंदोलनों पर केंद्रित करेंगे।
    उनके एजेंडे में मुख्य बिंदु शामिल हैं:

    1. फीस वृद्धि का विरोध – दिल्ली विश्वविद्यालय में हाल ही में बढ़ी फीस छात्रों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

    2. छात्रावास की कमी – बड़ी संख्या में छात्र बाहर से आते हैं, लेकिन पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं।

    3. महिला सुरक्षा – कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ASAP विशेष अभियान चलाएगा।

    4. शिक्षा की गुणवत्ता – ASAP का कहना है कि शिक्षा में शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    ASAP के फैसले पर अन्य छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

    • ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद): उन्होंने कहा कि चुनाव से भागना यह दिखाता है कि ASAP छात्रों का समर्थन हासिल करने में नाकाम है।

    • NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया): उनका कहना है कि ASAP को छात्र राजनीति में टिके रहने के लिए चुनावी प्रक्रिया से गुजरना ही होगा।

    • लेफ्ट संगठन: उन्होंने ASAP के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि वास्तविक मुद्दों पर काम करना ही छात्रों की सच्ची राजनीति है।

    राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ASAP का यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक है। पहला, संगठन अभी नया है और DUSU चुनाव में बड़ी पार्टियों जैसे ABVP और NSUI के मुकाबले उतनी पकड़ नहीं रखता। दूसरा, ASAP शायद बड़े चुनावी हार से बचना चाहता है ताकि उसकी विश्वसनीयता बनी रहे। तीसरा, जमीनी स्तर पर काम करके संगठन आने वाले सालों में एक मजबूत आधार खड़ा कर सकता है।

    दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के बड़े संगठनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ABVP, NSUI और वामपंथी संगठनों का प्रभाव यहां गहरा रहा है।
    ASAP का दावा है कि वे इस राजनीति में एक वैकल्पिक मॉडल पेश करेंगे, जहां शक्ति संघर्ष से ज्यादा छात्रों के अधिकारों पर जोर दिया जाएगा।

    छात्रों के बीच ASAP के इस कदम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ छात्रों का मानना है कि यह संगठन की कमजोरी को दिखाता है। वहीं, कई छात्र इसे सराहनीय मानते हैं कि ASAP पहले छात्रों के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहता है, न कि केवल बड़े पदों पर।

    ASAP का फैसला इस साल DUSU चुनावी माहौल को भले ही ज्यादा प्रभावित न करे, लेकिन इसकी रणनीति लंबे समय में असर डाल सकती है। यदि संगठन कैंपस स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बना लेता है, तो आने वाले चुनावों में यह एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

    ASAP का DUSU चुनाव 2025 से दूर रहना एक बड़ा और सोचा-समझा कदम है। यह संगठन को समय और अवसर देगा कि वह छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं पर काम करके अपनी साख बनाए। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ASAP वास्तव में छात्र राजनीति का नया चेहरा बन पाएगा या फिर अन्य छोटे संगठनों की तरह हाशिए पर रह जाएगा।

  • Related Posts

    NEET 2026 मामले में बड़ा ट्विस्ट; पूरा पेपर लीक नहीं हुआ था, कुछ सवाल वायरल होने पर परीक्षा रद्द

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। पेपर लीक विवाद के…

    Continue reading
    विक्रम माणिकराव पाटील के नेतृत्व में “श्री विठ्ठल सहकारी पतसंस्था” बन रही भरोसेमंद आर्थिक सशक्तिकरण की पहचान

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। महाराष्ट्र की सहकारिता परंपरा हमेशा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव मानी जाती रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *