कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 39 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के बाद देशभर से खिलाड़ियों को बधाइयाँ मिल रही हैं। प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी भारतीय खिलाड़ियों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि असली सफलता उन्हीं लोगों की होती है जो कठिन परिस्थितियों से निकलकर इतिहास रचते हैं।
इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए चुनौतीपूर्ण माने जा रहे थे, क्योंकि हॉकी, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे। ये वही खेल हैं जिनमें भारत परंपरागत रूप से सबसे अधिक पदक जीतता रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों को आशंका थी कि भारत का पदक प्रदर्शन पिछले संस्करण की तुलना में काफी कम रह सकता है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित किया।
भारत की सफलता में सबसे बड़ा योगदान मुक्केबाजों का रहा। भारतीय बॉक्सिंग टीम ने सात स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत की। वहीं जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने इतिहास रचा। अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। पुरुष वर्ग में हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रचा। वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो ट्रैक एंड फील्ड पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। उनके इस प्रदर्शन ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई।
आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय खिलाड़ियों की संघर्षपूर्ण यात्रा का उल्लेख करते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कई उपलब्धियाँ मिलीं, लेकिन दो कहानियों ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया। उन्होंने लिखा कि अस्मिता डे एक ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ उनके पिता साइकिल मरम्मत का काम करते थे और प्रतिदिन लगभग 300 रुपये कमाते थे। उनका परिवार मिट्टी के घर में रहता था और दुर्भाग्य से उनके पिता अपनी बेटी को इतिहास रचते हुए नहीं देख पाए।
उन्होंने दूसरी प्रेरणादायक कहानी गुलवीर सिंह की बताई, जो उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के एक किसान परिवार से आते हैं। आनंद महिंद्रा ने कहा कि गुलवीर ने कभी सेना की भर्ती के लिए फिटनेस हासिल करने हेतु गाँव की कच्ची पगडंडियों पर दौड़ना शुरू किया था और आज वही खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स में दो पदक जीतकर पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है।
महिंद्रा ने अपने संदेश में लिखा कि इन खिलाड़ियों ने किसी शॉर्टकट का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर सफलता हासिल की। उनके अनुसार यही वास्तविक अर्थों में भारत की प्रगति और नई पीढ़ी की प्रेरणा है।
भारत के लिए इस बार वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, जूडो, मुक्केबाजी और पैरा स्पोर्ट्स में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। मीराबाई चानू, दिलीप गावित, सोमन राणा, प्रीति पवार, जैसमीन लम्बोरिया, प्रियाघंघास, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल जैसे खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
कुल मिलाकर भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 39 पदक अपने नाम किए और कई युवा खिलाड़ियों ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन खिलाड़ियों को इसी तरह निरंतर अवसर और बेहतर सुविधाएँ मिलती रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत ओलंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी और अधिक मजबूत प्रदर्शन कर सकता है।
आनंद महिंद्रा का यह संदेश केवल खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। भारत के इन खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियाँ सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाने का माध्यम बन सकती हैं।








