इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वह कतर के प्रति “बहुत सावधानी” बरते। यह बयान उस घटना के बाद आया है जब इज़राइल ने हाल ही में कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं पर हवाई हमला किया। इस हमले में कई हमास प्रतिनिधियों की मौत हो गई और कतर के एक सुरक्षा अधिकारी की भी जान चली गई।
ट्रंप ने कहा कि कतर अमेरिका का “महत्वपूर्ण सहयोगी” है और उसकी संप्रभुता का सम्मान करना अनिवार्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमास आतंकवादी संगठन है, जिसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन वह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन का उल्लंघन करके नहीं हो सकती।
सूत्रों के मुताबिक, इज़राइल ने दोहा में हमास नेताओं की एक गुप्त बैठक पर हवाई हमला किया। यह वही बैठक थी जिसमें हमास और अन्य मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि संभावित युद्धविराम और बंदी-मुक्ति समझौते पर चर्चा कर रहे थे। इज़राइल का दावा है कि हमास नेता हमलों की योजना बना रहे थे और उन्हें “ऑपरेशनल अवसर” के आधार पर निशाना बनाया गया।
हमले के तुरंत बाद कतर सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और इसे “कायरतापूर्ण कार्रवाई” करार दिया। कतर ने कहा कि यह हमला शांति प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश है और इसका असर पूरे क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ेगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“इज़राइल को यह समझना होगा कि कतर हमारे लिए एक बेहद अहम सहयोगी है। हमें उसके साथ साझेदारी में बहुत सावधानी बरतनी होगी। मैं हमास के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का समर्थन करता हूं, लेकिन किसी सहयोगी की संप्रभुता को ठेस पहुंचाकर नहीं।”
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि इस हमले की जानकारी अमेरिका को बहुत देर से मिली और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। ट्रंप ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि इज़राइल ने ऐसे समय में हमला किया जब अमेरिका शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत था।
कतर सरकार ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह हमला न सिर्फ संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि वार्ता प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश भी है। कतर ने संयुक्त राष्ट्र और अरब देशों से अपील की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। कतर ने यह भी कहा कि वह मध्यस्थता की भूमिका जारी रखेगा लेकिन इज़राइल की यह कार्रवाई उसके लिए गंभीर चिंता का विषय है।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई आवश्यक थी क्योंकि हमास नेता इज़राइल पर और हमले की योजना बना रहे थे। नेतन्याहू ने दोहराया कि इज़राइल हमास को “पूरी तरह खत्म करने” के संकल्प से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान नागरिकों को नुकसान से बचाने की पूरी कोशिश की गई।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले की निंदा की और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता को और कमजोर करेगा। कई अरब देशों ने भी कतर की संप्रभुता के उल्लंघन को लेकर चिंता जताई। अमेरिका ने आधिकारिक बयान में कहा कि हमास के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन सहयोगी देशों की संप्रभुता को नुकसान पहुँचाना स्वीकार्य नहीं है।
इस हमले के बाद शांति प्रक्रिया को गंभीर झटका लगा है। हमास ने घोषणा की कि इज़राइल वार्ता प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है और अब किसी भी नए प्रस्ताव पर विचार करना मुश्किल होगा।
-
वार्ता के टूटने का सीधा असर बंधक समझौते और युद्धविराम की कोशिशों पर पड़ा है।
-
विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है तथा कतर पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज हो सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका इज़राइल का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार होते हुए भी उसकी हर कार्रवाई का समर्थन नहीं करेगा।
-
ट्रंप की नीति दोहरी चुनौती का सामना कर रही है:
-
हमास जैसे आतंकवादी संगठनों को कठोर जवाब देना।
-
कतर जैसे अहम सहयोगी देशों की भूमिका और संप्रभुता की रक्षा करना।
-
-
ट्रंप के लिए यह संतुलन बनाना बेहद मुश्किल होगा क्योंकि दोनों ही पक्ष अमेरिका के लिए कूटनीतिक दृष्टि से अहम हैं।
इज़राइल का यह कदम न केवल कतर और हमास के बीच वार्ता को प्रभावित करता है, बल्कि अमेरिका की कूटनीति के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ओर इज़राइल को स्पष्ट चेतावनी देकर कतर की अहमियत दर्शाई है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने हमास के खिलाफ कठोर कार्रवाई का समर्थन करके इज़राइल के हितों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया।








