सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पुलिस थानों में बंद कैदियों की सुरक्षा और लॉक-अप मौतों को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया है। कोर्ट ने इस मामले में सुझाव दिया है कि सभी थानों में AI नियंत्रित CCTV कैमरे लगाए जाएं, जो 24 घंटे निगरानी के साथ किसी भी आपात स्थिति का तुरंत अलर्ट दे सकें।
लॉक-अप मौतों के मामले समय-समय पर सुर्खियों में आते रहते हैं। मानव निगरानी में अक्सर चूक हो जाती है और परिणामस्वरूप कैदियों की जान चली जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या को हल करने के लिए तकनीक का उपयोग करने पर जोर दिया है।
कोर्ट ने माना कि केवल पारंपरिक निगरानी और पुलिस कर्मियों की ड्यूटी पर्याप्त नहीं है। एआई (Artificial Intelligence) से सुसज्जित CCTV कैमरे न केवल लगातार निगरानी कर सकते हैं, बल्कि किसी भी असामान्य गतिविधि, जैसे कैदी की सेहत में अचानक गिरावट या हिंसक घटना, को तुरंत पकड़ सकते हैं।
कोर्ट ने इस विषय पर कहा:
“हम चाहते हैं कि तकनीक का इस्तेमाल कर कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। लॉक-अप में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
पिछले कुछ वर्षों में देशभर के थानों में लॉक-अप मौतों की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
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मानव त्रुटि और निगरानी की कमी – अक्सर थाने में पर्याप्त स्टाफ नहीं होता।
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असामयिक मेडिकल जांच का अभाव – कई बार कैदियों की स्वास्थ्य समस्याओं को समय पर नहीं पहचाना जाता।
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मानसिक और शारीरिक यातना – कई मामलों में कैदियों पर हिंसा के आरोप सामने आते हैं।
AI CCTV की मदद से इन समस्याओं की पहचान तुरंत हो सकती है और तत्काल कार्रवाई संभव हो पाएगी।
AI आधारित निगरानी प्रणाली में कई उन्नत तकनीकें शामिल होंगी:
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फेशियल रिकग्निशन (Face Recognition): थाने में मौजूद सभी व्यक्तियों की पहचान।
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असामान्य गतिविधि का अलर्ट: जैसे किसी कैदी का अचानक गिरना, हमला या अस्वस्थ होना।
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24×7 निगरानी: मानव कर्मचारी की कमी में भी लगातार सुरक्षा।
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डेटा रिकॉर्डिंग और विश्लेषण: भविष्य में पुलिस थानों की सुरक्षा प्रणाली सुधारने में मदद।
इस तकनीक से केवल लॉक-अप मौतों की संख्या कम नहीं होगी, बल्कि कैदियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वे जल्द से जल्द सभी थानों में यह तकनीक स्थापित करें। इसके लिए आवश्यक बजट, ट्रेनिंग और रखरखाव का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कुछ बड़े राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पहले ही थानों में CCTV कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन AI इंटीग्रेशन अब तक व्यापक रूप से नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों को तकनीक अपग्रेड करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं।
AI CCTV सिस्टम को लागू करने में चुनौतियां भी होंगी:
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प्राइवेसी का सवाल: कैदियों और पुलिस कर्मियों की निजता सुनिश्चित करना।
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टेक्निकल और मेनटेनेंस की लागत: उच्च तकनीक कैमरों की देखभाल।
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शिक्षण और प्रशिक्षण: पुलिस कर्मियों को AI सिस्टम के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देना।
इन चुनौतियों का समाधान कोर्ट ने राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को संयुक्त रूप से करने का सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का AI CCTV पर जोर लॉक-अप मौतों को रोकने और थानों में सुरक्षा मानक बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल कैदियों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि पुलिस विभाग की जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।







