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  • नाशिक जिले में शुरू हुई घर-घर धान्य वितरण सेवा — दिव्यांग व वरिष्ठ नागरिकों तक 35 किलो राशन सीधे पहुँचाया गया

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    नाशिक जिले में एक मानवतावादी पहल के रूप में घर-घर धान्य वितरण सेवा की शुरुआत कर दी गई है। जिल्हा पुरवठा विभाग ने शुक्रवार को दिव्यांग व वरिष्ठ नागरिकों को उनके निवास स्थान पर ही राशन सामग्री पहुँचाने का अभियान आरंभ किया। इस परियोजना के तहत कुल 1,237 परिवारों — जिनमें 594 दिव्यांग और 643 वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं — को प्रतिविवार 35 किलो धान्य दिया गया, जिसमें 20 किलो गेहूं व 15 किलो चावल शामिल थे।

    इस वितरण अभियान का नेतृत्व जिल्हा कलेक्टर Ayush Prasad ने स्वयं किया। उन्होंने शहर तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जाकर लाभार्थियों को राशन सामग्री देते हुए कहा कि “प्रशासन की प्राथमिकता पात्र नागरिकों तक योजनाओं का लाभ सरलता से पहुँचाना है। दिव्यांग तथा वरिष्ठ नागरिकों को परिषद के फेयर-प्राइस दुकान (FPS) तक जाना आसान नहीं होता, इसलिए घर-घर वितरण जैसी सुविधा शुरू की गई है।”

    तालुका स्तर पर देखें तो सिन्नर तालुका में सबसे अधिक 160 परिवारों को लाभ मिला, इसके बाद सुरगाणा में 159 व मालेगाँव में 136 परिवारों को यह सुविधा प्रदान की गई। अन्य तालुकों जैसे नांदगाँव (10), निफाड (15) तथा देवळा (22) में भी इस सेवा की शुरुआत हो चुकी है। 
    इस अभियान में तालुका पुरवठा अधिकारी, ग्रामसेवक, आशा सेविका व स्थानीय स्वयं-सहायता समूह (NGO) सक्रिय भूमिका में रहे।

    इस कदम से न सिर्फ लाभार्थियों को राहत मिली है बल्कि उनके लिए सामाजिक दृष्टि से भी यह एक बड़ा बदलाव है। अब उन्हें फेयर-प्राइस दुकानों तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, भीड़ व समय की समस्या से मुक्त होकर वे बिना अतिरिक्त प्रयास के अपनी अधिकार-राशन प्राप्त कर सकते हैं।
    वृद्ध लाभार्थी माताजी ने कहा कि “उम्र व परेशानी के कारण दुकान तक जाना मुश्किल हो जाता था, आज प्रशासन ने घर आकर सामग्री दी, इससे बहुत राहत मिली।” इस तरह की प्रतिक्रिया इस अभियान की सफलता को दर्शाती है।

    ऐसी पहल आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। हालांकि देश की केंद्रीय नीति में अभी तक ऐसा सार्वभौमिक प्रावधान नहीं है कि दिव्यांग व वृद्ध लाभार्थियों तक नियमित तौर पर घर-घर राशन पहुंचाया जाए। उदाहरण के लिए केंद्र ने अगस्त 2025 में कहा था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत अभी तक उम्र-दर-उम्र या विकलांग लोगों को घर-घर धान्य देने का प्रावधान नहीं है।
    फिर भी नाशिक में यह पहल स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता व कार्य-प्रणाली को दर्शाती है।

    प्रशासन ने बताया है कि यह वितरण अभियान अब मासिक एक निश्चित दिन पर नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा ताकि लाभार्थियों को समय पर सामग्री मिलती रहे और योजना सुचारू रूप से चले।
    इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना है कि सरकार की योजनाएँ सिर्फ कागज पर न रह जाएँ बल्कि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुँचें।

    समाज-विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की पहल सामाजिक समावेशन (social inclusion) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वृद्ध और विकलांग वर्ग, जिन्हें अक्सर दूसरे-स्तर की प्राथमिकता दी जाती है, उन्हें उनकी पात्रता के आधार पर बिना अतिरिक्त बोझ के लाभ देना आसान नहीं रहता था। अब इस तरह के वितरण से उनकी स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

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