नाशिक जिले के चांदवड़ तालुका के पिंपलगांव ढबळी गांव में एक 21 वर्षीया युवती Mohini Ahire (काल्पनिक नाम) ने इसके बाद खुदकुशी कर ली, जिसे स्थानीय पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला माना है। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए युवती के पति व उसके पांच अन्य रिश्तेदारों-संबंधियों को ग़िरफ्तार कर लिया है।
घटना की शुरुआत उस समय हुई जब मोहिनी को शुक्रवार सुबह उसके पति Prakash Ahire के घर में फंदे से लटका पाया गया। परिवार ने उसे तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया और फिर नाशिक सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यही घटनाक्रम उसके पिता, जो जालगाँव-चालीसगाँव इलाके में किसान हैं, द्वारा दर्ज शिकायत में सामने आया।
मोहिनी के पिता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों से उसकी बेटी को लगातार मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न झेलना पड़ा है। उसके पति तथा सास-ससुर समेत अन्य परिवार के सदस्यों ने घर व वाहन खरीदने के लिए पैसे की मांग की थी। इस निरंतर प्रताड़ना के चलते, शिकायत के अनुसार युवती ने कोई और रास्ता नहीं देखा और आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने पंडित की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया। एफआईआर में भारत के नए दंड संहिता Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 85 (पति या पति-संबंधी द्वारा महिला के प्रति क्रूरता) के तहत आरोप शामिल हैं, साथ ही 351 (क्रिमिनल इंटिमिडेशन), 352 (जानबूझकर अपमान), 115(2) (स्वैच्छिक चोट पहुँचाना) जैसी धाराएँ भी लगाई गई हैं।
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर Amol More ने बताया है कि सभी छह आरोपी—युवती का पति व उसके पांच अन्य रिश्तेदार—को पुलिस हिरासत में लेते हुए कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें 11 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मामले की आगे की तहकीकात जारी है।
स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने भी नाराज़गी जाहिर की है। मोहिनी के पिता-माँ ने बताया कि बेटी को बार-बार कहा जाता था कि अगर पैसे नहीं दिए तो वह व परिवार आगे क्या करेंगे ये सोच लें। वे कहते हैं कि उनका बेटा-बहू वाहन-घर की बात करते रहते थे और दबाव तब और बढ़ा जब युवती ने पैसे नहीं दिए। इस तरह का मानसिक और आर्थिक दबाव आखिरकार भारी पड़ गया।
समाज कार्यकर्ताओं व महिला संगठन ने इस घटना को घरेलू क्रूरता व आर्थिक प्रताड़ना का चिन्ह बताया है। उनका कहना है कि युवती का पति-परिवार उसे इस डर में रखते थे कि अगर सहयोग नहीं किया तो स्थिति बिगड़ सकती है। इस तरह के मामले सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक समस्या के रूप में देखने की जरूरत है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस गांव-परिसर में महिलाओं द्वारा घरेलू उत्पीड़न के चलते आत्महत्या के मामले समय-समय पर सामने आए हैं, लेकिन अक्सर मामले दर्ज नहीं होते या दबे रह जाते हैं। इस तरह की कार्रवाई इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
पुलिस ने बताया है कि आगे आरोपी-परिवार के बैंक खाते, वाहन खरीदों, मांग की गई राशि की जांच की जाएगी। साथ ही युवती के निधन से पहले उसकी मानसिक स्थिति व दबाव के स्रोत को भी विश्लेषित किया जाएगा। जांच में फोरेंसिक रिपोर्ट, स्थानीय ग्रामीणों के गवाह बयान तथा आरोपी-परिवार की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू माहौल में बने दबाव, मांग तथा प्रताड़ना युवाओं पर कितना गहरा असर डाल सकती है। विशेष रूप से युवतियों के मामले में यह समस्या ज्यादा घातक साबित होती है, जहाँ परिवार-संबंधी दबाव व सामाजिक अपेक्षाएँ आत्महत्या के जोखिम को बढ़ा देती हैं।








