जम्मू-कश्मीर को लेकर राजनीतिक हलचलें लगातार तेज़ होती जा रही हैं। इस बीच, उप मुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी ने बागपत में एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट कर दिया कि केंद्र जल्द ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने वाला है। उनके इस वक्तव्य से राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है और इसे आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बागपत पहुंचे उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में परिस्थितियों में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए विकास की गति तेज हुई है। इसी के आधार पर केंद्र सरकार जल्द ही क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू करेगी। उनके अनुसार, “कश्मीर अब उस स्थिति में आ चुका है, जहां राज्य का दर्जा पुनः बहाल किया जा सकता है। जल्द ही जनता अच्छे नतीजे देखेगी।”
चौधरी ने इस मौके पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के बयानों पर भी तीखा पलटवार किया। महबूबा मुफ्ती हाल ही में केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाती रही हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि महबूबा मुफ्ती स्वयं “दुविधा की स्थिति” में हैं और अब यह तय नहीं कर पा रही हैं कि उन्हें किस दिशा में राजनीति करनी है। उन्होंने टिप्पणी की, “महबूबा मुफ्ती को पहले खुद यह समझना चाहिए कि वह चाहती क्या हैं। कभी 2019 में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ती हैं और फिर आज ऐसे बयान देती हैं, जो जमीन पर बनी नई परिस्थितियों से मेल ही नहीं खाते।”
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बदलाव कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज हो रही है, और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के अवसर बन रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के लोग स्थायी समाधान और शांति चाहते हैं, और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।
इस दौरान उन्होंने महबूबा मुफ्ती के हालिया आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा, “पीडीपी चीफ को खुद यह बताना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में हालात आखिर कब बेहतर थे? उनके कार्यकाल में आतंकवाद बढ़ा, प्रशासन ढीला पड़ा और आम लोग असुरक्षित महसूस करते थे। आज जब हालात सुधर रहे हैं, तो वे अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।”
चौधरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि महबूबा मुफ्ती ‘स्पष्ट रेखा’ खींचें और यह समझें कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना है। उनका यह बयान कहीं न कहीं यह इशारा भी करता है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति नए मोड़ ले सकती है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने सुरेंद्र चौधरी के बयान को केवल “राजनीतिक बयानबाज़ी” बताया है और कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की बात लंबे समय से होती आ रही है लेकिन ठोस कदम दिखाई नहीं देते। लेकिन उप मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह उम्मीद बढ़ गई है कि केंद्र सरकार अपने वादे की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य दर्जे की बहाली न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे वहां की जनता को आत्मनिर्भरता, प्रशासनिक सुगमता और लोकतांत्रिक अधिकारों की मजबूती का नया मार्ग मिलेगा। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और आने वाले महीनों के फैसलों पर टिकी हैं।








