नाशिक जिले के मालेगांव तालुका में रविवार की रात एक त्रासदी से झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। तीन वर्ष की मासूम लड़की अचानक गायब हो गई थी, और कुछ ही घंटों बाद उसका शव मोबाइल टॉवर के पास झाड़ियों में पाया गया। पुलिस ने इस दर्दनाक हादसे को दुष्कर्म और हत्या का मामला बताया है।
पुलिस के अनुसार, बच्ची परिवार के घर के पास खेल रही थी जब वह अचानक लापता हो गई। शाम करीब 6 बजे उसके माता-पिता ने देखा कि वह दिख नहीं रही है। जब वे करीब एक घंटे तक उसे नहीं ढूंढ पाए, तो उन्होंने 7 बजे पुलिस को सूचना दी। बच्ची के कुछ सहेलियों — जो पहले उसके साथ खेल रही थीं — ने पुलिस को बताया कि एक व्यक्ति ने चॉकलेट का लालच देकर उसे बुलाया था। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने पड़ोसी निर्माण मजदूर की गहन पूछताछ की।
जांच के दौरान पुलिस ने उसके घर के पास मोबाइल टॉवर परिसर के पास बच्ची का शव पाया। यह वही स्थान था जिसे बच्चों ने संदिग्ध के घर के पास बताया था। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की, और उसने कथित रूप से जुर्म कबूल किया। इसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया है। उसे न्यायिक कोठरी में 20 नवम्बर तक रिमांड पर रखा गया है।
घटनास्थल पर पहुंचे सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी यशवंत बाविस्कर ने बताया कि आरोपी उसी गाँव का रहने वाला है और निर्माण स्थल पर मजदूरी करता था। बच्ची का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, और जांच अधिकारी इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि अपराध के पीछे उसकी मंशा क्या थी, और क्या कहीं इसकी भनक किसी और को पहले ही थी।
पीड़ित परिवार और गांव वाले इस डरावनी घटना से गहरे सदमे में हैं। बच्ची के पिता ने मांग की है कि दोषी को कठोरतम सजा दी जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, उन्हें न्याय मिलना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। कई लोग दंड-न्याय के साथ-साथ सार्वजनिक उदाहरण की मांग कर रहे हैं — ताकि समाज में डर और चेतना बनी रहे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीणों ने भी सरकार और पुलिस व्यवस्था की ओर सवाल उठाया है। वे जानना चाहते हैं कि इतनी छोटी बच्ची अकेले खुले क्षेत्र में क्यों खेल रही थी और सुरक्षा तंत्र क्यों विफल रहा। इस घटना ने उस गांव में सुरक्षा, सामाजिक चेतना और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी की कुर्की और गहन जांच जारी है। वीडियो और साक्ष्य संकलन, पड़ोसियों से पूछताछ, और डीएनए रिपोर्ट जैसी आवश्यक जांचें की जा रही हैं। साथ ही, पुलिस यह सुनिश्चित करने में लगी है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में किसी तरह की कोताही न हो।
इस भयावह और संवेदनशील मामले ने पूरे इलाके में लोगों को झकझोर दिया है। तीन साल की मासूम की जान जाने की खबर न सिर्फ मालेगांव बल्कि प्रदेशभर में चिंता और आक्रोश का विषय बन गई है। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और न्यायपालिका पर यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे शीघ्र और सख्त कार्रवाई करें, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और समाज में बच्चों की सुरक्षा और गरिमा के प्रति विश्वास जागृत हो सके।








