बिहार की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों और सस्पेंस पर आज विराम लग जाएगा, जब नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। एनडीए विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगने के बाद यह साफ हो गया कि वे लगातार 10वीं बार राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। इस फैसले के साथ ही बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं का अंत हो गया है और सूबे की राजनीति एक नए मोड़ की ओर बढ़ गई है।
पटना में सोमवार देर शाम तक चले राजनीतिक बैठकों के दौर के बाद भाजपा विधायक दल ने भी अपने शीर्ष नेतृत्व का चयन किया। सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता और विजय कुमार सिन्हा को उपनेता चुना गया। बैठक में यह भी तय हुआ कि दोनों नेताओं को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके साथ ही भाजपा ने यह संदेश दे दिया कि वह नई सरकार में मजबूत हिस्सेदारी के साथ शामिल होने को तैयार है।
आज 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है। राज्य में उत्सुकता है कि शपथ ग्रहण में कौन-कौन शामिल होगा और नई कैबिनेट की क्या रूपरेखा होगी। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ कुल 20 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।
नई कैबिनेट में सहयोगी दलों के बीच मंत्रियों के वितरण को बेहद ही सावधानी से तय किया गया है। मंत्रिमंडल में जातीय, राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, ताकि गठबंधन मजबूती के साथ आगे बढ़ सके। खबरों के अनुसार जदयू से 8 मंत्री बनाए जाएंगे। इनमें लंबे समय से पार्टी में सक्रिय और संगठनात्मक रूप से मजबूत नेताओं को मौका मिल सकता है। जदयू का प्रयास है कि कैबिनेट में अनुभवी और नए चेहरों के बीच संतुलन कायम रहे, ताकि सरकार सुचारू रूप से चल सके।
भाजपा से भी 8 मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। भाजपा अपने कोटे के मंत्रियों में उन नेताओं को स्थान देने की तैयारी कर रही है जो संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं और जनता के बीच उनकी पकड़ मजबूत है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा इस बार कुछ युवा चेहरों को भी शामिल कर सकती है, ताकि सरकार और पार्टी दोनों में नई ऊर्जा का संचार हो।
लोजपा (रामविलास) के कोटे से तीन नेताओं को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। चिराग पासवान की पार्टी ने अपनी राजनीतिक हैसियत को पिछले चुनावों में साबित किया था, और अब नई सरकार में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। लोजपा का फोकस उन क्षेत्रों पर है, जहां उनका मजबूत जनाधार है, और इसी आधार पर मंत्री चुने जाने की संभावना है।
इसके अलावा, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) से एक और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो से एक मंत्री को शामिल किया जाएगा। दोनों दलों को प्रतिनिधित्व देकर एनडीए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि गठबंधन की सभी इकाइयों को समान सम्मान दिया जा रहा है।
शपथ ग्रहण को लेकर पटना में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। गांधी मैदान के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और समारोह स्थल के भीतर वीआईपी, मीडिया और आम लोगों के प्रवेश के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह कार्यकाल कई मायनों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा सुधार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर नई सरकार को तुरंत ध्यान देना होगा। इसके साथ ही गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना भी सरकार की पहली प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
आज का दिन बिहार की राजनीति के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत का दिन माना जा रहा है। अब सबकी नजरें गांधी मैदान पर होंगी, जहां नीतीश कुमार शपथ लेकर अपने नए कार्यकाल की शुरुआत करेंगे।








