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ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर में इस हफ्ते एक अविश्वसनीय और भावुक घटना घटी, जिसने मंदिर में मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। यह घटना सोमवार को हुई, जब एक पिता अपने 10 दिनों से कोमा में पड़े बेटे को गोद में लेकर मंदिर के द्वार तक आया। डॉक्टरों ने पहले ही बेटे की मौत की पुष्टि कर दी थी और उसे घर भेजते समय कहा था कि अब उसे कोई उम्मीद नहीं है।

हालांकि, इस असहाय पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बेटे को गोद में लेकर भगवान जगन्नाथ के सामने आखिरी उम्मीद के साथ प्रार्थना की। मंदिर में मौजूद भक्त और सुरक्षा गार्ड भी इस नज़ारे को देखकर भावुक हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्चा देखने में बिल्कुल मृत सा लग रहा था। वह शिथिल अवस्था में पड़ा था और शरीर में कोई हलचल नहीं थी।
जैसे ही मंदिर में मंगल आरती की प्रक्रिया शुरू हुई और मंत्रोच्चार हुआ, उस समय एक अद्भुत चमत्कार हुआ। बच्चा अचानक हिलने लगा, उसकी आँखें खुलीं और धीरे-धीरे उसने पुकारा, “बापदादा”। यह नजारा देखकर मंदिर में मौजूद लोग स्तब्ध और भावुक हो गए। सभी को विश्वास नहीं हो रहा था कि जो बच्चा मरा समझा जा रहा था, वह अब अपने पिता की गोद में जीवन के प्रति जाग उठा।
इस घटना को देखने के लिए वहां बड़ी संख्या में भक्त और स्थानीय लोग भी मौजूद थे। मंदिर के सुरक्षा गार्ड भी पहले तो पिता को रोकने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पिता की गहन प्रार्थना और उसके रोने-बिलखने ने सभी को भावुक कर दिया। जब बच्चा अचानक जागा, तो यह क्षण मंदिर में उपस्थित हर किसी के लिए आश्चर्य और आस्था का अनुभव बन गया।
बच्चे के पिता ने कहा कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ से अंतिम उम्मीद रखी थी और उनके आशीर्वाद ने उनके बेटे को पुनर्जीवित किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था, लेकिन उनका भरोसा और आस्था उन्हें यहां तक लेकर आई।
मंदिर में मौजूद लोगों ने कहा कि यह चमत्कार उनके लिए एक अद्भुत और प्रेरणादायक घटना है। यह घटना केवल धार्मिक या आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानवीय आस्था और पिता-पुत्र के गहरे बंधन की मिसाल भी बन गई।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और डॉक्टरों द्वारा उसकी निगरानी जारी है। चिकित्सकों ने भी इस घटना को चमत्कारिक करार दिया है, क्योंकि यह शारीरिक रूप से असंभव माना जा रहा था कि कोई व्यक्ति इतने लंबे कोमा से अचानक जाग सके।
इस चमत्कार ने न केवल बच्चे के परिवार को खुशी और राहत दी है, बल्कि मंदिर में उपस्थित लोगों के दिलों में भी भगवान जगन्नाथ के प्रति आस्था को और मजबूत किया है। यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों में भी तेजी से फैल रही है और लोगों के लिए आस्था और आशा का प्रतीक बन गई है।
जगन्नाथ पुरी मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि यह घटना मंदिर के इतिहास में दर्ज की जाएगी और इसे श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा और आस्था का संदेश माना जाएगा।
यह अद्भुत घटना साबित करती है कि कभी-कभी मानव आस्था और ईश्वर में विश्वास ही असंभव को संभव कर सकता है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो कठिन परिस्थितियों में उम्मीद खो चुका हो।








