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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की पत्नी और राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने हाल ही में एक बयान देकर देशभर में सुर्खियां बटोरी हैं। जया बच्चन ने खुलासा किया कि संसद में लगातार बढ़ती हलचल और शोर के कारण उन्हें सुनने में कठिनाई हो रही है। उनका यह बयान उस समय आया जब राजनीतिक दलों के बीच गर्मागर्म बहस और विवादित चर्चा लगातार हो रही हैं।
जया बच्चन ने कहा कि संसद में बहस कभी-कभी इतनी तेज और असंबद्ध हो जाती है कि सांसदों को अपने सहयोगियों की बातें समझने में भी दिक्कत होती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संसद का मकसद केवल बहस करना या विवाद पैदा करना नहीं है, बल्कि वहां निर्णय प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाना और जनता के हित में काम करना है।
उन्होंने आगे कहा कि संसदीय कार्यवाही में शांति और अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। सांसदों को चाहिए कि वे अपने विचारों को सम्मानपूर्वक रखें और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें। जया बच्चन ने यह भी सुझाव दिया कि संसद के अंदर की व्यवस्था और प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि बहस और चर्चा का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ न बने बल्कि यह देशहित में काम आए।
राज्यसभा सांसद ने यह भी बताया कि संसद में शोर के कारण कभी-कभी उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल होने में मुश्किल होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजनीतिक दल और संसद के सभी सदस्य अनुशासन का पालन करेंगे और एक-दूसरे की बातों को समझने के लिए प्रयास करेंगे।
जया बच्चन का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। उनके समर्थन में कई सांसद और राजनीतिक विश्लेषक भी सामने आए हैं, जिन्होंने कहा कि संसद में शांति बनाए रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि यदि संसद में अनुशासन और समझदारी का वातावरण रहेगा तो न केवल सांसद बल्कि जनता भी बेहतर निर्णय प्रक्रिया का लाभ उठा सकेगी।
यह पहली बार नहीं है जब जया बच्चन ने संसद और राजनीतिक व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त किए हों। पिछले समय में भी उन्होंने कई मौकों पर संसद में सुधार और सार्वजनिक हित के मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही थी। उनका यह हालिया बयान यह संकेत देता है कि वे संसद में कार्यवाही को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर भी संसद में शांति और अनुशासन के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। आम जनता और राजनीतिक विशेषज्ञ दोनों ही इस मुद्दे पर अपने विचार साझा कर रहे हैं। जया बच्चन का संदेश स्पष्ट है कि लोकतंत्र में बहस और विचार-विमर्श जरूरी हैं, लेकिन इसे सभ्य और अनुशासित तरीके से किया जाना चाहिए।
इस तरह, जया बच्चन का बयान न केवल संसद की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है, बल्कि यह सांसदों और जनता दोनों को यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया तभी सफल होगी जब संवाद और अनुशासन का सही संतुलन बना रहे।








