
डॉ. किरण शिंदे का जन्म 5 सितंबर 1980 को नाशिक जिले के एकलहरे गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता त्र्यंबक रामजी शिंदे महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल (MSEB) के एकलहरे पावर हाउस में कार्यरत थे। माता हिराबाई शिंदे ने सीमित संसाधनों में भी परिवार को मजबूती से संभाला और बच्चों को ईमानदारी, मेहनत और सादगी के संस्कार दिए। बड़े परिवार और सीमित आय ने किरण को कम उम्र में ही संघर्ष का महत्व सिखा दिया।
विद्यालय जीवन में किरण पढ़ाई में औसत छात्र थे। उन्हें पढ़ाई से डर लगता था और दसवीं पास कर पाना भी एक चुनौती थी। बावजूद इसके, उन्होंने हार नहीं मानी और 48 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने आईटीआई (ITI) में प्रवेश लिया और वहां 69 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेती और श्रम कार्य भी किया, जिससे उन्हें व्यावहारिक जीवन की गहरी समझ मिली।
जब किरण अपने भविष्य को संवारने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई। हालात इतने खराब थे कि अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। दोस्तों से उधार लेकर उन्होंने यह जिम्मेदारी निभाई। उसी दिन से किरण पर पूरे परिवार – मां, बहनों और भाई – की जिम्मेदारी आ गई।
परिवार के पालन-पोषण के लिए किरण ने कोई भी काम छोटा नहीं समझा। उन्होंने खेत मजदूरी, हमाली और बाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। उनके पास बाइक नहीं थी, इसलिए वे रोज़ 30 से 60 किलोमीटर तक साइकिल से ड्यूटी पर जाते थे। तेज धूप, ठंड या बारिश – किसी भी परिस्थिति ने उनकी मेहनत को रोक नहीं पाया।
साल 2010 में उनका विवाह निफाड़ तालुका के चाठोरी गांव की ज्योति आनंद खालकर से हुआ। पत्नी ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और कम आय में भी घर संभाला। इसी दौरान किरण के मन में यह विचार पनपा कि वे पूरी जिंदगी दूसरों के लिए काम करने के बजाय समाज में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।
सिक्योरिटी की नौकरी के दौरान उन्हें प्राकृतिक और बिना दवा वाले उपचार पद्धतियों की जानकारी मिली। उन्होंने एक्यूप्रेशर, कपिंग थेरेपी और कायरोप्रैक्टिक का गहन अध्ययन करने का निर्णय लिया। आर्थिक तंगी के बावजूद पत्नी के आभूषण गिरवी रखकर उन्होंने प्रशिक्षण पूरा किया। दिन में नौकरी और रात में पढ़ाई – यह संघर्ष अंततः रंग लाया।

डॉ. किरण शिंदे आज भी अपने संघर्ष के दिनों को नहीं भूले हैं। गरीब और जरूरतमंद मरीजों से वे नाममात्र शुल्क लेते हैं और कई बार मुफ्त इलाज भी करते हैं। उनका मानना है कि कोई भी व्यक्ति पैसों की कमी के कारण इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए। पत्नी ज्योति क्लिनिक के संचालन में सहयोग करती हैं और उनका बेटा सूरज भी सेवा और संवेदनशीलता के संस्कार सीख रहा है।
आज डॉ. किरण शिंदे एक सफल थेरपिस्ट होने के साथ-साथ हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। जिनके पास कभी पिता के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे, वही व्यक्ति आज सम्मानजनक जीवन जी रहा है और समाज की सेवा कर रहा है।
डॉ. किरण शिंदे की कहानी यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, जिद, मेहनत और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है।
हमाली से लेकर थेरपिस्ट बनने तक का यह सफर केवल आर्थिक उन्नति का नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और मानव सेवा का प्रतीक है।
शून्य से शिखर तक पहुंचे इस संघर्षवीर को नमन!
डॉ. किरण त्र्यंबक शिंदे के निरंतर परिश्रम, समर्पण और समाजसेवा को सम्मान देते हुए उन्हें वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित
“Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025”
पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया है।
यह सम्मान Reseal.in एवं India Fashion Icon Magazine द्वारा प्रदान किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते हुए उद्यमियों, व्यवसायियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जाना जाता है।
यह चयन न केवल डॉ. किरण शिंदे के लिए, बल्कि उनके गांव, क्षेत्र और पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
इस भव्य पुरस्कार समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी, जिनमें शामिल हैं:
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वर्षा उसगांवकर – प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री
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सोनाली कुलकर्णी – लोकप्रिय भारतीय अभिनेत्री
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प्रार्थना बेहेरे – चर्चित मराठी एवं हिंदी फिल्म अभिनेत्री
इन प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति से समारोह का गौरव और भी बढ़ेगा।
यह भव्य कार्यक्रम श्री सुधीर कुमार पठाडे,
संस्थापक एवं सीईओ – Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.)
के कुशल नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है।
श्री पठाडे लगातार महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों, डिजाइनर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में आयोजित यह पुरस्कार समारोह प्रेरणा, सम्मान और अवसरों का संगम साबित हो रहा है।
डॉ. किरण त्र्यंबक शिंदे का यह सम्मान यह सिद्ध करता है कि संघर्ष, ईमानदारी और सेवा भाव से किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता।
उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।








