संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, खासकर एनडीए को संभावित समर्थन और आगामी परिसीमन (Delimitation) विधेयक को लेकर।
प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी को किसानों की समस्याओं, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपा। बैठक की तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत और विभिन्न विषयों पर चर्चा होती दिखाई दी।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है और ऐसे में एनसीपी (शरद पवार गुट) के सांसदों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल ही में सुप्रिया सुले ने कहा था कि यदि सरकार सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटों की समान वृद्धि का लिखित आश्वासन देती है, तो उनकी पार्टी इस विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है। उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि शरद पवार गुट का एक वर्ग भविष्य में एनडीए के साथ आने का पक्षधर हो सकता है। हालांकि, भाजपा सूत्रों के अनुसार, यदि ऐसा कोई औपचारिक राजनीतिक गठबंधन बनता है, तो उससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों का एकीकरण होना आवश्यक माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल किसी एक गुट या व्यक्तिगत नेताओं को एनडीए में शामिल करने के बजाय पूरी पार्टी के स्तर पर निर्णय चाहती है। इसी कारण महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों एनसीपी गुटों के बीच संभावित मेल-मिलाप को लेकर भी चर्चाएं लगातार जारी हैं।
विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बैठक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, बैठक के बाद किसी भी पक्ष की ओर से संभावित राजनीतिक गठबंधन या समर्थन को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल इसे किसानों के मुद्दों और संसदीय विषयों पर हुई औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक मायनों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।








