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  • संघर्ष से सशक्तिकरण तक: ‘मराठी मेंटर कविता पारिख’ बनीं हजारों महिलाओं की प्रेरणा

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    तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में आज आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं। लेकिन छोटे शहरों और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाली कई महिलाएँ आज भी सामाजिक सोच और परिस्थितियों की बेड़ियों में जकड़ी रहती हैं। ऐसी ही परिस्थितियों को चुनौती देकर अपनी अलग पहचान बनाने वाली एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं — कविता पारिख, जिन्हें आज देशभर में “मराठी मेंटर कविता पारिख” के नाम से जाना जाता है।

    छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में जन्मी और पली-बढ़ी कविता पारिख का जीवन एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में शुरू हुआ, जहाँ आर्थिक संघर्ष रोज़मर्रा की सच्चाई थी। समाज की वही पुरानी बातें — “इतना पढ़कर क्या करना?”, “शादी कर लो”, “बड़े सपने अमीरों के लिए होते हैं” — उनके आत्मविश्वास को बार-बार चुनौती देती रहीं।

    कविता 12वीं कक्षा से आगे पढ़ाई नहीं कर सकीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि सपनों को उड़ान मिल सके। उन्होंने अपने पिता को हर मौसम में कड़ी मेहनत करते देखा और अपनी माँ को 25 वर्षों तक सोना न पहनते हुए, त्याग और संघर्ष का जीवन जीते हुए देखा। छह सदस्य एक छोटे से टीन शेड वाले कमरे में रहते थे, जो बारिश के मौसम में पानी से भर जाता था।

    एक दिन कविता के मन में एक सवाल उठा —
    “क्या मेरी ज़िंदगी बस इतनी ही है, या मैं कुछ और बन सकती हूँ?”
    यही सवाल उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया।

    उम्र, आत्मविश्वास की कमी, समाज का डर और असफलता की आशंका — सब उनके सामने दीवार बनकर खड़े थे। लेकिन इसी दौरान उनका परिचय डिजिटल दुनिया से हुआ। सोशल मीडिया, ऑनलाइन टूल्स और तकनीक — सब कुछ उनके लिए नया था। अनुभव नहीं था, लेकिन दृढ़ निश्चय था

    कविता ने धीरे-धीरे डिजिटल स्किल्स सीखना शुरू किया। गलतियाँ हुईं, असफलताएँ मिलीं, आत्मसंदेह भी आया — लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर दिन सीखते हुए उन्होंने महसूस किया कि डिजिटल स्किल्स केवल तकनीक नहीं, बल्कि पहचान और आत्मनिर्भरता की कुंजी हैं।

    घर से काम करते हुए, समय को अपने अनुसार मैनेज करते हुए उन्होंने न केवल कमाई शुरू की, बल्कि अपना आत्मसम्मान भी वापस पाया।

    अपने सफर के दौरान कविता ने महसूस किया कि वह अकेली नहीं हैं। हजारों महिलाएँ करियर ब्रेक, डर और सामाजिक दबाव के कारण खुद को खो चुकी हैं। यहीं से जन्म हुआ “Marathi Mentor Kavita Parikh” पहल का — एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जो लोगों को खासकर महिलाओं को उनकी मातृभाषा मराठी में डिजिटल करियर की राह दिखाता है।

    शुरुआत में कुछ ही लोग जुड़े, लेकिन सच्चाई और अनुभव ने भरोसा बनाया — और यही भरोसा एक आंदोलन बन गया।

    आज कविता पारिख 3000 से अधिक लोगों को डिजिटल स्किल्स में मार्गदर्शन दे चुकी हैं। इनमें गृहिणियाँ, करियर रीस्टार्ट करने वाली महिलाएँ, छात्र, युवा प्रोफेशनल्स और छोटे व्यवसायी शामिल हैं।

    कई महिलाओं ने पहली बार कमाई की, आत्मविश्वास के साथ बोलना सीखा और खुद पर भरोसा करना शुरू किया।
    कविता कहती हैं —
    “यह सफर सिर्फ पैसे का नहीं, मानसिक बदलाव का है।”

    डिजिटल सफलता ने कविता को वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों तक पहुँचाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भाग लिया और एक मजबूत प्रोफेशनल पहचान बनाई — वह भी अपनी मराठी संस्कृति से जुड़े रहते हुए।

    कविता की सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार या यात्रा नहीं, बल्कि पहचान है।
    वे कहती हैं —
    “आज मैं खुद को सिर्फ किसी की बेटी नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र मराठी मेंटर के रूप में देखती हूँ।”

    कविता पारिख का संदेश साफ है —
    “करियर दोबारा शुरू करने का कोई सही समय नहीं होता। सही फैसला ही सबसे ज़रूरी होता है।”

    उनके योगदान को मान्यता देते हुए कविता पारिख को “Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025” पुरस्कारों के लिए चुना गया है। यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा दिया जा रहा है।

    इस भव्य समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में शामिल होंगी —
    वर्षा उसगांवकर – बॉलीवुड अभिनेत्री
    सोनाली कुलकर्णी – भारतीय अभिनेत्री
    प्रार्थना बेहेरे – भारतीय अभिनेत्री

    कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है —
    श्री सुधीर कुमार पठाडे,
    Founder & CEO – Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.)
    के नेतृत्व में, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहे हैं।

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