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भारत और फ्रांस के बीच भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद का प्रस्ताव अगले कुछ दिनों में रक्षा मंत्रालय से मंजूल होने वाला है, जिससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा हथियार सौदा बन सकता है। यह निर्णय फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के पहले आने की उम्मीद के बीच लिया जा रहा है।
इस प्रस्ताव की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ है और इसमें “मेक इन इंडिया” पहल के तहत करीब 100 विमानों का भारत में निर्माण और तकनीकी साझेदारी शामिल है। इससे देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
राफेल क्यों खास है?
राफेल एक ट्विन-इंजन मल्टी-रोल जेट है, जिसे दसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) ने बनाया है। यह हवा में श्रेष्ठता, जमीन पर टोही और प्रिसिजन स्ट्राइक जैसी क्षमताओं के साथ आता है, जिससे भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता और बढ़ेगी।
भारत पहले ही 36 राफेल विमान प्राप्त कर चुका है और नौसेना के लिए 26 राफेल-M (नौसैनिक) विमान भी आदेश दिए हैं। यह नया 114 विमान का प्रस्ताव इन देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा।
‘मेक इन इंडिया’ भागीदारी
इस डील की एक खास बात यह है कि इसमें विमानों का कुछ हिस्सा भारत में ही बनेगा, जिसमें तकनीकी हस्तांतरण शामिल है। इससे स्थानीय उद्योगों को भी फायदा होगा और विमान के रख-रखाव तथा लॉजिस्टिक्स में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना के तहत भारत में राफेल के प्रमुख घटकों की निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी कंपनियों की भागीदारी भी होगी।
रणनीतिक महत्व
विश्लेषकों का मानना है कि यह सौदा भारतीय वायु शक्ति को और अधिक रणनीतिक रूप से सक्षम बनाएगा। राफेल जेट्स उच्च-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं, लंबी दूरी की मिसाइल ले जाने और फ्लाइट प्रदर्शन में अग्रणी माने जाते हैं, जो विविध सुरक्षा परिदृश्यों में आवश्यक साबित हो सकते हैं।








