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  • संघर्ष से सफलता तक: राजू आनंदाचे और Rajtech Engineering की प्रेरणादायक कहानी

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    कभी-कभी जिंदगी इंसान को इतनी कठिन परिस्थितियों से गुजराती है कि वहां से लौटकर वही व्यक्ति एक मिसाल बन जाता है। राजू आनंदाचे की कहानी ऐसी ही प्रेरणा देने वाली कथा है। कर्नाटक के बेलगांव जिले के होनगा गांव से शुरू हुआ उनका संघर्ष आज Rajtech Engineering को पैन इंडिया स्तर पर स्थापित कर चुका है।

    राजू आनंदाचे का जन्म एक किसान परिवार में हुआ। घर मिट्टी का था और छत गन्ने के पत्तों से बनी हुई थी। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी।

    आठवीं कक्षा के दौरान गांव की जत्रा (मेले) के दिन उनके घर में आग लग गई और पूरा घर जलकर राख हो गया। कपड़े, किताबें और वर्षों की मेहनत एक ही दिन में खत्म हो गई।

    उस हादसे के बाद उन्होंने आठवीं, नौवीं और दसवीं की पढ़ाई एक ही स्कूल ड्रेस में पूरी की। दसवीं की अंतिम परीक्षा के समय उनकी पैंट फट गई, लेकिन नई खरीदने की क्षमता नहीं थी। उन्होंने अंदर से इलेक्ट्रिक टेप लगाकर उसी पैंट में परीक्षा दी।

    दसवीं की शुरुआत में गंभीर बीमारी के कारण दो महीने अस्पताल में रहना पड़ा। सहामाही परीक्षा से स्कूल में दोबारा प्रवेश मिला, तब तक आधा पाठ्यक्रम समाप्त हो चुका था।

    लेकिन उन्होंने स्व-अध्ययन के दम पर पूरा सिलेबस तैयार किया और गांव में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

    इंजीनियर बनने का सपना था, पर प्रवेश नहीं मिला। घर की हालत बिगड़ चुकी थी। गणेश उत्सव की 15 रुपये की फीस देने तक के लिए पैसे नहीं थे। आखिरकार मजबूरी में पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी।

    कॉलेज छोड़ने के बाद 20 रुपये महीने की नौकरी से करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे वेतन 35 और फिर 55 रुपये हुआ। जब 60 रुपये करने की बात कही तो 5 रुपये बढ़ाने के बजाय उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

    यह उनके जीवन का सबसे बड़ा अपमान था। उसी दिन उन्होंने खुद से वादा किया —
    “एक दिन मैं कुछ बड़ा बनकर दिखाऊंगा।”

    अनुभव लेते-लेते उन्हें दुबई जाने का मौका मिला। वहां तीन वर्षों तक अच्छी नौकरी और सुविधाएं मिलीं।

    लेकिन उनके मन में एक विचार लगातार चलता रहा —
    “अगर मैं यहां रहूंगा तो अकेला आगे बढ़ूंगा, लेकिन भारत लौटकर मैं अपने जैसे कई लोगों को रोजगार दे सकता हूं।”

    2009 में उन्होंने भारत लौटकर एक छोटा वर्कशॉप शुरू किया।

    शुरुआत में छोटे प्रोजेक्ट मिले। गोवा में एक जटिल कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसे अन्य लोग पूरा नहीं कर पाए थे। धीरे-धीरे उनका विश्वास और काम दोनों बढ़ते गए।

    बाद में उन्होंने खानापुर में अपना बड़ा वर्कशॉप शुरू किया, जहां से लोग रोजगार के लिए बाहर जाते थे। उन्होंने वहीं उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया।

    पहले ही वर्ष में बड़ी ऑर्डर मिली और टर्नओवर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

    आज स्थिति यह है कि जिस कॉलेज ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया था, उसी कॉलेज के इंजीनियर आज उनकी कंपनी में कार्यरत हैं।

    अब तक कुल 7 बड़े प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए हैं:

    • आंध्र प्रदेश – 4

    • नेपाल – 3

    वर्तमान में 5 प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं:

    • गुजरात – 2

    • महाराष्ट्र – 2

    • आंध्र प्रदेश – 1

    इसके अतिरिक्त उनके उत्पाद उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा तक पहुंच चुके हैं।

    आज Rajtech Engineering गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पंजाब, जम्मू, उत्तराखंड और नेपाल तक अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है।

    आज उनकी कंपनी में 100 से 120 कर्मचारी कार्यरत हैं। लेकिन उनके लिए ये सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं।

    दुबई छोड़ते समय उन्होंने जो सपना देखा था — “अकेले अमीर बनने से बेहतर है दस लोगों को रोजगार देना” — वह आज साकार हो चुका है।

    उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा और उद्योग जगत में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित “Maharashtra Business Icon” पुरस्कार के लिए उनका चयन किया गया है।

    यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा प्रदान किया जा रहा है।

    इस भव्य समारोह में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री Prarthana Behere विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

    कार्यक्रम का आयोजन Sudhir Kumar Pathade, संस्थापक एवं CEO, Reseal.in के नेतृत्व में किया जा रहा है।

    राजू आनंदाचे की कहानी हमें सिखाती है कि
    परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत इंसान को शिखर तक पहुंचा सकती है।

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