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सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना को रोकने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत याचिकाकर्ता पर खासे नाराज नजर आए और याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर कड़ी फटकार लगाई।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा—
“आपने याचिका में इस तरह की भाषा कैसे लिखी? ऐसी बदतमीजी वाली भाषा कहां से लाते हो?”
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है।
याचिका में केंद्र सरकार को जाति आधारित जनगणना रोकने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इसके अलावा, एकल संतान वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए नीतियां बनाने की भी अपील की गई थी।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को इसी तरह की एक अन्य याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसमें 2027 की जनगणना में जातिगत आंकड़े दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
सरकारी योजना के मुताबिक, 2027 की जनगणना देश की:
- पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी
- और 1931 के बाद पहली बार व्यापक जाति आधारित डेटा शामिल किया जाएगा
CJI ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि ऐसे मुद्दों पर पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सभी प्रयास विफल हो जाएं, तभी अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि न्यायपालिका न सिर्फ याचिकाओं की सामग्री, बल्कि उनकी भाषा और प्रस्तुति को भी गंभीरता से देखती है। साथ ही, जाति आधारित जनगणना जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अदालत का रुख फिलहाल हस्तक्षेप से दूर रहने का दिख रहा है।








