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  • खतरे की घंटी! Strait of Hormuz संकट से तेल-गैस ही नहीं, AI और MRI सिस्टम पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा

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    मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz के लंबे समय से बंद रहने का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता जा रहा है। यह संकट केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि हीलियम, सल्फर और एल्युमिनियम जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की सप्लाई को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर आधुनिक तकनीक जैसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), MRI मशीनों और रक्षा उद्योग पर पड़ सकता है।

    Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई है।

    इस संकट का सबसे बड़ा असर हीलियम गैस पर देखने को मिल रहा है, जो आधुनिक तकनीक और चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है। हीलियम का उपयोग MRI मशीनों के सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने, सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण और एयरोस्पेस उद्योग में किया जाता है।

    Qatar दुनिया के सबसे बड़े हीलियम उत्पादकों में शामिल है, और यहां गैस प्रोसेसिंग में आई रुकावट के कारण हर महीने लाखों क्यूबिक मीटर हीलियम बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, हीलियम की कीमतें दोगुनी तक बढ़ चुकी हैं।

    AI टेक्नोलॉजी, जिसे आमतौर पर केवल सॉफ्टवेयर समझा जाता है, वास्तव में हार्डवेयर और औद्योगिक संसाधनों पर निर्भर है। चिप निर्माण में हीलियम की भूमिका अहम होती है, इसलिए इसकी कमी AI विकास की गति को भी प्रभावित कर सकती है।

    United States सहित कई देशों में सल्फर की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सल्फर की कीमतें 165% तक बढ़कर 650 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार पहुंच गई हैं।

    सल्फर का उपयोग सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में होता है, जो तांबा निष्कर्षण, बैटरी निर्माण और सेमीकंडक्टर उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी कमी से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।

    एल्युमिनियम, जो विमान, सैन्य उपकरण और औद्योगिक मशीनरी में इस्तेमाल होता है, उसकी कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। खाड़ी देशों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण वैश्विक बाजार में इसकी कीमतें चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई हैं।

    United Arab Emirates और Bahrain जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन बाधित होने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

    हीलियम, सल्फर और एल्युमिनियम की कमी का सीधा असर AI, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों के उत्पादन पर पड़ सकता है। माइक्रोचिप निर्माण, सैटेलाइट सिस्टम, मिसाइल तकनीक और संचार उपकरण सभी इन संसाधनों पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो न केवल टेक्नोलॉजी सेक्टर बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक सप्लाई चेन कितनी नाजुक है। एक समुद्री मार्ग के बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास प्रभावित हो सकता है।

    होर्मुज स्ट्रेट का संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती बन चुका है। तेल-गैस के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं तक पर इसका असर दिखने लगा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में AI, MRI और रक्षा उद्योगों में बड़ी बाधाएं देखने को मिल सकती हैं।

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