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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते का 14 बिंदुओं वाला मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें युद्ध समाप्त करने से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के तहत सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने और तनाव कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।
30 दिनों के भीतर खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य
मसौदे की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर पुनः खोलना है। हालांकि इसका संचालन और निगरानी ईरान के नियंत्रण में रहने का प्रस्ताव रखा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका हटाएगा नौसैनिक नाकाबंदी
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को 30 दिनों के भीतर ईरान के आसपास की नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करनी होगी तथा क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी कम करनी होगी।
साथ ही अमेरिका द्वारा ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने की भी बात समझौते में शामिल की गई है।
तेल प्रतिबंधों में राहत का प्रस्ताव
समझौते के मसौदे में ईरानी तेल पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने या निलंबित करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक तेल बाजार में राहत मिल सकती है और कच्चे तेल की कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान को मिलेगा 24 अरब डॉलर का फंड
मसौदे के अनुसार ईरान के लगभग 24 अरब डॉलर के फ्रीज फंड को जारी करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता योजना तैयार करने की भी चर्चा की गई है।
परमाणु हथियार नहीं बनाने का दोहराया वादा
ईरान ने मसौदे में एक बार फिर यह आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
इसके बदले अमेरिका ने वार्ता अवधि के दौरान क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति नहीं बढ़ाने और ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता जताई है।
60 दिनों तक जारी रहेगी विस्तृत वार्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत बातचीत करेंगे।
समझौते के अनुपालन की निगरानी के लिए एक विशेष तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जबकि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से मंजूरी दिलाने की योजना बनाई गई है।
आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी
हालांकि मेहर न्यूज एजेंसी ने समझौते के मसौदे का विवरण प्रकाशित किया है, लेकिन अब तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौते को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलना अभी बाकी है और कई बिंदुओं पर आगे चर्चा की संभावना बनी हुई है।
मिसाइल कार्यक्रम को बातचीत से रखा गया बाहर
गौरतलब है कि इस मसौदे में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन देने जैसे संवेदनशील मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यही मुद्दे भविष्य की वार्ताओं में सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
मध्य पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा कदम
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इसे मध्य पूर्व में स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।








