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  • नीट पेपर लीक पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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    अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़
    नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मंगलवार को प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही परीक्षा अनियमितताओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है और अब जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

    22 लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

    प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. के.के. ध्रुव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा देशभर में लगातार आंदोलन और विरोध दर्ज कराने के बाद ही केंद्र सरकार को नीट परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला लेना पड़ा।

    उन्होंने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक ने देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में डाल दिया। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली पर विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर हुआ है और इसके लिए केंद्र सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठना देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    छात्र आत्महत्याओं को बताया व्यवस्था की विफलता

    कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह बघेल ने कहा कि पेपर लीक के कारण उत्पन्न तनाव और अनिश्चितता ने कई छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि देश के विभिन्न राज्यों में कई विद्यार्थियों ने इस तनाव के चलते आत्महत्या तक कर ली।

    उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे मामलों पर रोक नहीं लग सकी।

    बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में पूरी तरह असफल रही है।

    शिक्षा बजट में कटौती का लगाया आरोप

    ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दया वाकरे ने केंद्र सरकार पर शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में लगातार कटौती की जा रही है, जिसका सीधा असर देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर दिखाई दे रहा है।

    उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा को पर्याप्त संसाधन नहीं मिलेंगे तो पारदर्शी और मजबूत परीक्षा व्यवस्था की उम्मीद करना मुश्किल होगा।

    सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग

    जिला महामंत्री राकेश मसीह ने मांग की कि पूरे नीट पेपर लीक मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।

    उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर अधिकारी, संस्थाएं या अन्य प्रभावशाली लोग शामिल हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    NTA को भंग करने की उठी मांग

    जिला उपाध्यक्ष नारायण शर्मा ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्था परीक्षा संचालन में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

    उन्होंने मांग की कि NTA को भंग कर उसकी जगह एक नई, पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से मजबूत संस्था का गठन किया जाए, जो भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित कर सके।

    परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता

    जिला उपाध्यक्ष कमाल खान ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए केवल जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित हो।

    दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

    प्रेसवार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।

    उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार लागू किए जाएं ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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