अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए किसी भी जांच का कोई वास्तविक महत्व नहीं होता और ऐसी SIT “बिना तीर की कमान” साबित होगी।
इस बीच रामलला को दान में अर्पित किए गए कथित चांदी के ‘कागभुसुंडि’ के गायब होने का दावा भी सामने आया है, जिसके बाद यह विवाद और अधिक राजनीतिक और धार्मिक चर्चा का विषय बन गया है।
FIR के बिना SIT पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक SIT की जांच प्रभावी नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिना कानूनी कार्रवाई के गठित SIT केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उनके अनुसार यदि हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं, तो यह जांच से अधिक मामले को दबाने या बांटने का प्रयास प्रतीत होता है।
‘कागभुसुंडि’ गायब होने के दावे पर सरकार घिरी
सपा प्रमुख ने कहा कि अब रामलला को दान में दिए गए चांदी के ‘कागभुसुंडि’ के गायब होने की खबर भी सामने आई है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह लगातार चढ़ावे, दान और धार्मिक वस्तुओं में कथित गड़बड़ियों के दावे सामने आ रहे हैं, उससे करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
नेपाल सीमा तक बंद करने की कही बात
अपने बयान में अखिलेश यादव ने तंज भरे अंदाज में कहा कि जिस प्रकार हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं, उसे देखते हुए नेपाल और अन्य सीमाओं पर भी कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि यदि कोई आरोपी हो तो वह फरार न हो सके।
हालांकि उन्होंने यह टिप्पणी राजनीतिक व्यंग्य के रूप में की।
200 किलो चांदी की रसीद मांगने का मामला
राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़ तब आया जब कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक डॉ. राजू वी. मनवानी ने दावा किया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक-एक किलो वजन की 200 चांदी की ईंटें दान में दी थीं।
उन्होंने कहा कि दान देने के समय उन्हें इसकी कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई थी। अब जब दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की खबरें सामने आ रही हैं, तो उन्हें चिंता है कि उनकी ओर से दी गई चांदी का उपयोग आखिर कहां हुआ।
डॉ. मनवानी ने बताया कि उन्होंने संबंधित पक्षों से दान की रसीद और उपयोग का पूरा विवरण मांगा है।
लगातार बढ़ रही राजनीतिक बयानबाजी
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। समाजवादी पार्टी इसे आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
दूसरी ओर सरकार की ओर से पहले ही मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया जा चुका है।
13 जून को गठित हुई थी SIT
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को शामिल किया गया था।
SIT ने कई दिनों तक दस्तावेजों की जांच, संबंधित लोगों से पूछताछ और अन्य तथ्यों का परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। हालांकि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
बढ़ता जा रहा है विवाद
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। एक ओर विपक्ष निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं सरकार जांच प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने की बात कह रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि SIT की रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या इस मामले में औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।








