राजेश चौधरी | हनुमानगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा उपखंड स्थित गांव झाँसल की बेटी और भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित द्वितीय नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें महिला हॉकी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
सविता पूनिया वर्षों से भारतीय महिला हॉकी टीम की मजबूत दीवार रही हैं। अपनी शानदार गोलकीपिंग, नेतृत्व क्षमता और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय महिला हॉकी को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह के दौरान सविता पूनिया ने पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया। यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान और विशेष रूप से हनुमानगढ़ जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है। उनके सम्मानित होने की खबर मिलते ही भादरा, झाँसल और पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई।
सविता पूनिया की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, खेल प्रेमियों तथा क्षेत्रवासियों ने उन्हें हार्दिक बधाई दी। सभी ने इसे राजस्थान की बेटियों के लिए प्रेरणादायक क्षण बताते हुए कहा कि सविता ने अपनी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष से यह साबित किया है कि छोटे गांवों से निकलकर भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
गांव झाँसल की बेटी सविता पूनिया आज देशभर की युवा खिलाड़ियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
भारतीय महिला हॉकी टीम में सविता पूनिया ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को अनेक महत्वपूर्ण जीत दिलाई हैं। कठिन मुकाबलों में उनके शानदार बचाव और नेतृत्व ने उन्हें विश्व हॉकी की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शामिल किया है। खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान के लिए चुना।
सविता पूनिया का यह सम्मान न केवल उनके खेल जीवन का सबसे बड़ा पड़ाव है, बल्कि हनुमानगढ़ जिले और पूरे राजस्थान के लिए भी गौरव का क्षण है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में आगे बढ़ने और देश का नाम रोशन करने के लिए लगातार प्रेरित करती रहेगी।








