स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में छपने वाली छोटी-सी गलती भी कई बार बड़ा विवाद खड़ा कर देती है। इस बार ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला ओडिशा से सामने आया है, जहां कक्षा 5 की पाठ्यपुस्तक में बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय की फिल्म हम दिल दे चुके सनम का लोकप्रिय गीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ गलती से प्रकाशित हो गया। जैसे ही यह मामला सामने आया, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे और अभिभावकों में नाराजगी फैल गई।
5वीं की किताब में कैसे पहुंचा फिल्मी गाना?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तैयार की गई नई पाठ्यपुस्तकों को ऑनलाइन प्रकाशित किया गया था। इसी दौरान लोगों की नजर कक्षा 5 की एक पुस्तक पर पड़ी, जिसमें 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का मशहूर गीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ छपा हुआ मिला।
यह गाना अभिनेत्री ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया था और आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है। लेकिन इसका प्राथमिक विद्यालय की पाठ्यपुस्तक में शामिल होना पूरी तरह संपादकीय और प्रिंटिंग की गंभीर चूक माना जा रहा है।
अभिभावकों ने उठाए सवाल
इस गलती के सामने आने के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आखिर इतनी बड़ी त्रुटि पुस्तक छपने से पहले किसी की नजर में क्यों नहीं आई?
कई अभिभावकों ने पूछा कि जब किताबें लाखों छात्रों तक पहुंचाई जाती हैं, तब गुणवत्ता जांच (Quality Check) की प्रक्रिया इतनी कमजोर कैसे हो सकती है।
1600 से ज्यादा गलतियां मिलीं
रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला केवल एक गीत के गलत छपने तक सीमित नहीं है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशित 55 नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 गलतियां पाई गई हैं।
इनमें भाषा संबंधी त्रुटियों से लेकर तथ्यात्मक, संपादकीय और प्रिंटिंग संबंधी अनेक गंभीर गलतियां शामिल हैं।
सरकार ने दिखाई सख्ती
मामला सामने आने के बाद ओडिशा सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूरे प्रकरण की समीक्षा की और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुछ अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी त्रुटियों को जल्द से जल्द सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
गुणवत्ता जांच पर उठे सवाल
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में गलतियों का मिलना गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन से पहले कई स्तरों पर समीक्षा और संपादन की प्रक्रिया होती है, ऐसे में इतनी बड़ी चूक होना चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल की किताबें बच्चों की बुनियादी शिक्षा का आधार होती हैं, इसलिए उनमें तथ्यात्मक और भाषाई शुद्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
देश के विभिन्न राज्यों में पहले भी पाठ्यपुस्तकों में तथ्यात्मक और संपादकीय गलतियों के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि, किसी प्राथमिक कक्षा की किताब में लोकप्रिय बॉलीवुड गीत का गलती से प्रकाशित होना बेहद असामान्य माना जा रहा है।
फिलहाल शिक्षा विभाग त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया में जुटा है और उम्मीद की जा रही है कि संशोधित संस्करण जल्द जारी किए जाएंगे, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर इसका कोई असर न पड़े।








