अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हुए अंतरिम सीजफायर को समाप्त घोषित किए जाने के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
बुधवार दोपहर कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,700 अंकों से अधिक टूटकर 76,472 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया। इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 9 लाख करोड़ रुपये घट गया।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “बीमार मानसिकता वाले लोग” बताया। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी कच्चे तेल पर दी गई छूट भी वापस ले ली, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गईं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड भी करीब 74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। निवेशकों को आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारतीय बाजार में चौतरफा बिकवाली
बाजार में लगभग सभी सेक्टर दबाव में रहे। हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया VIX करीब 26 प्रतिशत उछल गया। निफ्टी बैंक, FMCG, ऑयल एंड गैस, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी भारी दबाव में रहे।
ग्लोबल बाजारों का भी रहा नकारात्मक असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिला। यूरोप के प्रमुख सूचकांक FTSE 100, CAC 40 और DAX में गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे।
रुपया और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ। दूसरी ओर अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा, जिससे इक्विटी बाजारों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों की नजर आगे की स्थिति पर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान के अगले कदम और वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिति पर रहेगी।








