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  • बारिश में फिर डूबा गुरुग्राम: जलभराव और ट्रैफिक जाम ने खोली ‘मिलेनियम सिटी’ के इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल

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    देश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले गुरुग्राम में एक बार फिर मानसून ने शहर की आधारभूत संरचना की पोल खोल दी है। लगातार बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) पर नरसिंहपुर के पास सड़क धंस गई, जिससे करीब 8 से 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। प्रशासन को जयपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी करने पड़े।

    गुरुग्राम, जिसे ‘मिलेनियम सिटी’ के नाम से जाना जाता है, देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट और आईटी हब में शामिल है। यहां 25,000 से अधिक कॉर्पोरेट कार्यालय और लगभग 250 फॉर्च्यून-500 कंपनियों के कार्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद हर मानसून में जलभराव और ट्रैफिक जाम शहर की सबसे बड़ी समस्या बन जाते हैं।

    करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं मिली राहत

    2016 के चर्चित ‘गुरुजाम’ के बाद से वर्ष 2025 तक गुरुग्राम की ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने पर लगभग 503 करोड़ रुपये खर्च किए गए। हाल ही में 105 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 4.3 किलोमीटर लंबा लेग-4 स्टॉर्म वॉटर ड्रेन भी शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य जलभराव की समस्या कम करना था। हालांकि, भारी बारिश के दौरान इसका अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दिया।

    सर्वे में सामने आई गंभीर स्थिति

    एक सर्वे के अनुसार, गुरुग्राम के 96 प्रतिशत दैनिक यात्रियों ने बताया कि जलभराव के कारण उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक समय ट्रैफिक में बिताना पड़ता है। वहीं 2024 के एक अन्य सर्वे में 86 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हर साल होने वाला जलभराव उनके दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

    सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके

    बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में सबसे अधिक जलभराव और ट्रैफिक की समस्या देखी गई—

    • सोहना रोड
    • सुभाष चौक
    • उद्योग विहार
    • गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड
    • नरसिंहपुर
    • सेक्टर 10A और सेक्टर 48

    जलभराव की प्रमुख वजहें

    विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुग्राम की भौगोलिक स्थिति, अरावली से आने वाला बारिश का पानी, अपर्याप्त ड्रेनेज क्षमता, समय पर नालों की सफाई न होना और खराब रखरखाव इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। बारिश के दौरान मुख्य सड़कें जलमग्न होने से पूरा ट्रैफिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर आ जाता है, जिससे लंबा जाम लग जाता है।

    अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर असर

    बार-बार होने वाले जलभराव का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं है। कई कॉर्पोरेट कंपनियों को कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करना पड़ता है। वहीं हजारों वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं, ऑटो-टैक्सी चालकों और छोटे व्यापारियों की आय प्रभावित होती है तथा ईंधन की भी भारी बर्बादी होती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई सड़कें बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। शहर को भविष्य में जलभराव से बचाने के लिए मजबूत ड्रेनेज नेटवर्क, नियमित रखरखाव और दीर्घकालिक शहरी योजना की आवश्यकता है।

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