एमपीएससी (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। शुरुआती दावों के विपरीत अब सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था और आयोग को भेजी गई शिकायत फर्जी निकली है।
जानकारी के अनुसार, आयोग को ई-मेल के माध्यम से पेपर लीक की शिकायत भेजी गई थी। मामले की जांच के दौरान पता चला कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई प्रश्नपत्रिका का एमपीएससी की ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से कोई संबंध नहीं था। बताया जा रहा है कि वायरल प्रश्नपत्रिका किसी टेस्ट सीरीज़ की थी, न कि आयोग की आधिकारिक प्रश्नपत्रिका।
सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता गौरव पाटील और लोकेश पाटील ने आयोग को नया ई-मेल भेजकर स्वीकार किया है कि उनकी पहले की शिकायत गलत थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग की प्रश्नपत्रिका लीक नहीं हुई थी और आयोग की छवि खराब करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था।
ई-मेल में यह भी कहा गया है कि कुछ लोगों ने इस जानकारी का गलत अर्थ निकालकर सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह फैला दी। आरोप है कि परीक्षा दोबारा कराने के उद्देश्य से यह अफवाह फैलाने की साजिश रची गई।
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का आरोप लगाया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि, अब सामने आई नई जानकारी के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि एमपीएससी फर्जी शिकायत और आयोग को गुमराह करने के मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अफवाहों पर अंकुश लगाने को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।








