भारत के युवा मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस जीत के साथ अंकुश ने भारत के लिए कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है और अब उनकी नजर स्वर्ण पदक पर है।
हरियाणा के सोनीपत निवासी 19 वर्षीय अंकुश पंघाल ने अपने खेल करियर की शुरुआत कबड्डी से की थी। करीब तीन वर्षों तक कबड्डी खेलने के बाद उनके पिता ने उन्हें व्यक्तिगत खेल अपनाने की सलाह दी। पिता का मानना था कि टीम खेलों की तुलना में व्यक्तिगत खेलों में पहचान बनाने के अधिक अवसर होते हैं। इसके बाद अंकुश ने बॉक्सिंग को चुना और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
अंकुश का परिवार खेलों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता स्वयं कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं, जबकि उनकी तीन बहनों में दो शूटिंग और एक बॉक्सिंग से जुड़ी हैं। अंकुश अपने पिता को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानते हैं।
अंकुश पंघाल ने कम उम्र में ही कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने ASBC यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। इसके बाद 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वर्ष 2026 में एलीट मेन्स नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में जगह बनाकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
सेमीफाइनल में एकतरफा जीत दर्ज करने के बाद अंकुश पंघाल अब फाइनल मुकाबले में उतरेंगे, जहां उनके पास भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की महिला मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी 54 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया है। उनका रजत पदक पहले ही पक्का हो चुका है और अब वह स्वर्ण पदक के लिए कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो से मुकाबला करेंगी।








