केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को मुंबई हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उनके खिलाफ कथित डीपफेक (Deepfake) और मानहानिकारक वीडियो एवं AI से तैयार की गई भ्रामक सामग्री को तत्काल हटाने का आदेश दिया है।
E20 कार्यक्रम से जोड़कर फैलाया जा रहा था भ्रामक कंटेंट
नितिन गडकरी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को केंद्र सरकार के E20 (एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) कार्यक्रम से गलत तरीके से जोड़कर पेश किया गया है।
उन्होंने अदालत से इन वीडियो और पोस्ट पर रोक लगाने तथा संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
गूगल, मेटा, एक्स और यूट्यूब को निर्देश
याचिका में गडकरी ने Google, Meta, X (पूर्व में Twitter) और YouTube सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से आपत्तिजनक सामग्री हटाने और भविष्य में ऐसे कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।
मुंबई हाईकोर्ट ने इन प्लेटफॉर्म्स को याचिका में उल्लिखित सभी आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि संबंधित सामग्री “बेहद मानहानिकारक, घृणास्पद और आपत्तिजनक” है। अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री का सार्वजनिक मंचों पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जहां समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं की पहुंच होती है।
व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका नाम, चेहरा, आवाज या पहचान AI तकनीक के माध्यम से इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व अधिकारों और प्रतिष्ठा का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में कानून सख्त कार्रवाई करेगा।
भविष्य में भी होगी सख्त कार्रवाई
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में नितिन गडकरी के खिलाफ इसी प्रकार के डीपफेक या AI-जनित मानहानिकारक वीडियो और सामग्री सामने आती है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत सूचित कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई हाईकोर्ट का यह फैसला AI और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग पर सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को भी स्पष्ट करता है।








