राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजस्थान को गौरवान्वित करने वाली उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बाड़मेर, राजस्थान के युवा बुनकर श्री बरीगा राम को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया। उनकी इस उपलब्धि पर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बरीगा राम की कला, कौशल और साधना राजस्थान की पीढ़ियों पुरानी हथकरघा परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उनकी उपलब्धि युवा पीढ़ी को पारंपरिक कला और शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करेगी।
बाड़मेर के युवा बुनकर को राष्ट्रीय सम्मान
बाड़मेर के युवा बुनकर बरीगा राम को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार मिलना राजस्थान की समृद्ध हथकरघा परंपरा के लिए गौरव का विषय है। उनकी कला और मेहनत ने प्रदेश की पारंपरिक बुनाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस उपलब्धि को राजस्थान के सभी नागरिकों के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बुनकरों और कारीगरों की मेहनत हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुख्यमंत्री ने खरीदी खादी
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर के अजमेरी गेट स्थित राजस्थान हैंडलूम हाउस से खादी से निर्मित उत्पादों की खरीदारी भी की।
इस दौरान उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और प्रदेश के बुनकरों एवं कारीगरों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
हथकरघा राजस्थान की गौरवशाली विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की समृद्ध कला, लोक संस्कृति और पारंपरिक शिल्प बुनकरों एवं कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही मेहनत, हुनर और सृजनशीलता का परिचायक हैं।
उन्होंने कहा कि हथकरघा राजस्थान की गौरवशाली विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इस विरासत का संरक्षण और प्रोत्साहन कर इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज और सरकार की जिम्मेदारी है।
‘लोकल के लिए वोकल’ बनने का आह्वान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों के प्रति बढ़ती जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सभी को ‘लोकल के लिए वोकल’ बनना चाहिए और स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों के उत्पादों को प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे उनके हुनर को सम्मान मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी।
बुनकरों और कारीगरों को प्रोत्साहन जरूरी
राजस्थान में हथकरघा और हस्तशिल्प केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। बरीगा राम जैसे युवा बुनकरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से इस क्षेत्र से जुड़े अन्य युवाओं को भी अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बाड़मेर के बुनकर बरीगा राम को मिला यह सम्मान राजस्थान की पारंपरिक कला, हुनर और हथकरघा विरासत की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।






