बिहार के सीवान में 25 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कांस्टेबल द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। बिहार सरकार ने सीवान के पुलिस अधीक्षक (SP) पूरन कुमार झा को उनके पद से हटा दिया है। उन्हें नई पोस्टिंग दिए जाने से पहले वेटिंग में रखा गया है।
इस मामले में AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं, घटना के समय सीवान में तैनात रहे अन्य अधिकारियों को अभी तक नई पोस्टिंग नहीं दी गई है।
25 जुलाई को हुआ था AK-47 से फायरिंग का मामला
यह घटना 25 जुलाई को सीवान के जेपी चौक के पास छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई थी। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया है कि कांस्टेबल अभिषेक कुमार प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंस गए थे।
सरकार के अनुसार, कांस्टेबल ने भीड़ से निकलने और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में अपनी AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी।
तीन प्रदर्शनकारियों को लगी थी गोली
हालांकि, बिहार सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि उस दिन पुलिस कार्रवाई के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली से चोटें आई थीं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इन चोटों का संबंध कांस्टेबल अभिषेक कुमार द्वारा AK-47 से की गई फायरिंग से नहीं था। हलफनामे के मुताबिक, घायल हुए तीनों प्रदर्शनकारी उस स्थान पर मौजूद नहीं थे, जहां से कांस्टेबल ने फायरिंग की थी।
9mm पिस्टल से भी हुई थी फायरिंग
बिहार सरकार के हलफनामे में प्रदर्शन के दौरान फायरिंग की एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया गया है।
सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) निलेश कुमार सिंह ने भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास में अपनी 9mm पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संयम बरता और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुपातहीन बल का इस्तेमाल नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने रखा अपना पक्ष
AK-47 से फायरिंग का मामला उन याचिकाओं से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सामने आया, जिनमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
बिहार सरकार ने अपने जवाब में फायरिंग की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई का विवरण देते हुए कहा कि कांस्टेबल भीड़ में घिर गया था और उसने स्थिति से निपटने के लिए हवा में गोलियां चलाई थीं।
तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
उन्होंने पूछा कि छात्र प्रदर्शन में तैनात एक कांस्टेबल को AK-47 कैसे उपलब्ध हुई? उन्होंने यह भी सवाल किया कि यह हथियार किस यूनिट या शस्त्रागार से जारी किया गया था और AK-47 जैसे आधुनिक हथियार को जारी करने की अनुमति किस अधिकारी ने दी थी।
तेजस्वी यादव ने हथियार जारी करने की पूरी कमांड चेन की जांच किए जाने की मांग से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
एसपी को हटाए जाने के बाद जांच पर नजर
सीवान के एसपी पूरन कुमार झा को पद से हटाए जाने के बाद अब मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। वहीं, AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बिहार सरकार के हलफनामे और पुलिस कार्रवाई को लेकर सामने आए तथ्यों पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीवान में 25 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 से हुई फायरिंग के मामले में बिहार सरकार ने सीवान के एसपी पूरन कुमार झा को पद से हटा दिया है। AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल अभिषेक कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। सरकार के अनुसार, AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए गए और उनसे कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ। हालांकि, उसी दिन पुलिस कार्रवाई में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली की चोट लगने की बात सरकार ने स्वीकार की है। वहीं, तेजस्वी यादव ने कांस्टेबल को AK-47 जारी किए जाने की प्रक्रिया और पूरी कमांड चेन पर सवाल उठाए हैं।







